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दुल्हन के शाप से बाराती बने चीड़ का पेड़

नारी के शक्तिस्वरूप की महिमा का वर्णन उत्तराखंड के कुमाऊं अंचल के लोक आख्यानों में भी मिलता है। ऐसी ही एक कथा में बताया गया है कि एक दुल्हन के श्राप से सभी बाराती चीड़ का पेड़ बन गए थे और इस घटना के प्रमाण आज भी मौजूद हैं।
 
कहा जाता है कि कुमाऊं अंचल के गैवाड़ क्षेत्र में लगभग सौ साल पहले द्वाराहाट और भटकोट के बीच नैरपानी के जंगल में बारातियों ने एक नई नवेली दुल्हन को मरने के लिए गहरी खाई में फेंक दिया था और उसने मरते समय उन्हें चीड़ के पेड़ बन जाने का श्राप दिया। तत्काल सभी बाराती वहीं चीड़ के पेड़ बन गए। यह भी कहा जाता है कि वे बाराती आज भी चीड़ के रूप में मौजूद हैं।
 
बात पुरानी है.. एक बारात चीड़ के जंगल में संकरी-सी पगडंडी से होकर भटकोट से द्वाराहाट जा रही थी। शाम होने को थी और बहुत दूर जाना था। दूल्हा और दुल्हन की डोलियों को कंधे पर उठाए कहार जल्दी जल्दी रास्ता तय कर रहे थे। चीड़ के पत्तों के कारण पगडंडी पर बड़ी फिसलन थी। बहुत संभल-संभल कर चलना पड़ रहा था। बारातियों में बड़े-बूढ़ों ने कहारों को पहले ही सावधान कर दिया था कि रास्ते में बहुत फिसलन है इसलिए संभल कर चलना जरूरी है। लेकिन कहारों को खुद पर बड़ा भरोसा था। बारातियों के टोकने के बावजूद कहार लगभग दौड़ रहे थे।

बारात नैरपानी पहुंच चुकी थी। शाम गहरी हो चुकी थी। कहारों की चाल तेज थी। अचानक वह हादसा हो ही गया जिसकी आशंका थी। दूल्हे की डोली को कंधे पर लिए चारों कहारों के कदम अचानक पगडंडी पर फिसले जिससे डोली डगमगाती हुई उनके कंधों से फिसलकर पगडंडी पर जा गिरी और देखते ही देखते दूल्हा डोली के साथ गहरी खाई में जा गिरा। बाराती अब आपस में कानाफूसी करने लगे कि दूल्हा तो मर गया दुल्हन का अब क्या किए जाए? सिर्फ दुल्हन को लेकर जाना किस मतलब का है। बिना दूल्हे के बारात का अब कोई मतलब नहीं है। बारातियों में बड़ी देर तक विचार-विमर्श होता रहा। आखिरकार उन्होंने सर्वसम्मति से फैसला किया कि दुल्हन की डोली को खाई में फेंक दिया जाए। वह भी मरकर दूल्हे के साथ स्वर्गलोक पहुंच जाएगी। देखते ही देखते बारातियों ने दुल्हन की डोली को पहाड़ से नीचे खाई में लुढ़का दिया। दुल्हन की डोली भी दूल्हे की डोली के पास जा गिरी। उसका शरीर क्षत-विक्षत हो गया। वह अंतिम सांसें ले रही थी। उसकी मुंदती आंखों में बारातियों के लिए घोर तिरस्कार भरा हुआ था और उसने उन्हें चीड़ का पेड़ बन जाने श्राप दे दिया।

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  • Web Title:दुल्हन के शाप से बाराती बने चीड़ का पेड़