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दो टूक

यूपी पुलिस अपनी पीठ ठोक सकती है कि उसने एक और खूंखार इनामी डकैत को मार गिराया लेकिन यह सवाल उसका पीछा नहीं छोड़ेगा कि चित्रकूट के गाँव में एक अकेला डाकू एक रायफल लेकर उसे तीन दिन कैसे छकाता रहा। चार सिपाही मारे गए और दो बड़े अफसर समेत कई घायल हुए मगर डकैत तब मारा गया जब वह जंगल की तरफ भाग रहा था। यानी फर्जी मुठभेड़ों की चैम्पियन यूपी पुलिस वास्तविक मुठभेड़ के लिए वास्तव में तैयार नहीं है। यह अत्यंत दुखदाई तथ्य है। यह हमारी पुलिस की जमीनी स्थिति, तैयारी, प्रशिक्षण और ट्रेनिंग पर जबर्दस्त टिप्पणी है। डकैत तो पुरानी चुनौतियाँ हैं, बढ़ते आतंकवाद और आतंकियों की ताजातरीन रणनीतिक चुनौतियों के सामने आखिर वह कैसे खड़ी होगी? जरा नहीं, खूब सोचिए।

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