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एमटीपी का फैसला अब हाईकोर्ट से होगा

13 हफ्ते की गर्भवती पीड़िता का दर्द अभी और लंबा चलेगा। उसकी जिंदगी का फैसला अब हाईकोर्ट के हाथ में है। जघन्य अपराध का शिकार हुई पीड़िता का भविष्य हाईकोर्ट ने पीजीआई की एक्सपर्ट बॉडी पर छोड़ा था। पीजीआई एक्सपर्ट बॉडी ने यह निर्णय फिर से हाईकोर्ट की शरण में भेज दिया है। हाईकोर्ट के निर्णय में लिखा गया था कि पीड़िता के एमटीपी से इनकार करने के बाद भी पीजीआई उसके हित में निर्णय ले। अगर विशेषज्ञ समझते हैं कि एमटीपी पीड़िता के हित में नहीं है तो 1 जुलाई को हाईकोर्ट में सुनवाई की जाएगी। इसके लिए पीजीआई को दस दिनों का समय दिया गया था, जिसके लिए अभी दो दिन बाकी हैं।


10 जून को हुई थी पीड़िता पेश
पीजीआई एक्सपर्ट बॉडी के सामने 10 जून को पीड़िता को पेश किया गया था। एक्सपर्ट बॉडी में शामिल साइकेट्रिस्ट ने पीड़िता से एमटीपी को लेकर सवाल पूछा था, जिस पर मंदबुद्धि लड़की ने शिशु को जन्म देने की इच्छा जताई थी। दूसरी तरफ फिर से सवाल पूछने पर पीड़िता ने इससे इनकार किया था। विशेषज्ञों के अनुसार 60 फीसदी आईक्यू स्तर का व्यक्ति  जिम्मेदारी नहीं संभाल सकता। बहरहाल, इस पर सेशन जज राज राहुल गर्ग ने जीएमसीएच-32 को पीड़िता का कुछ समय तक गर्भपात न करने के आदेश भेजे, जिसमें उसका मेडिकल करने के साथ-साथ उसे पौष्टिक आहार देने की भी बात कही गई।


कोर्ट के पास गया निर्णय
इस पर फिलहाल पीजीआई एक्सपर्ट बॉडी चुप्पी साधे हुए है। गौरतलब है कि पीड़िता की प्रेग्नेंसी को 13 हफ्ते हो चले हैं, और 20 हफ्तों तक ही गर्भपात की अनुमति है। उस पर भी गायनी विशेषज्ञों का मानना है कि ढाई महीने के बाद गर्भपात करना मरीज के लिए सेहतमंद नहीं रहता। सूत्रों के अनुसार पीजीआई एक्सपर्ट बॉडी एमटीपी का निर्णय हाई कोर्ट में भेज दिया है। हालांकि पीड़िता के मेडिकल टेस्ट से लेकर अन्य सभी जांच को पूरा कर लिया गया है। क्लॉज के अनुसार ऐसा तभी किया जाना था, जब पीजीआई एक्सपर्ट बॉडी एमटीपी करने के लिए सहमत नहीं होती।


पांच के सैंपल लिए गए
इस मामले में बुधवार को पुलिस ने पांच और कर्मचारियों के ब्लड सैंपल लिए। जबकि मंगलवार को नौ कर्मचारियों के सैंपल लिए थे। ये सैंपल नारी निकेतन व आश्रय के कर्मचारियों के लिए गए हैं।


बुधवार को हुआ पीड़िता का जेनेटिक टेस्ट
बुधवार को जीएमसीएच-32 में पीड़िता का जेनेटिक टेस्ट किया गया। इस टेस्ट में गर्भ में पल रहे शिशु की मानसिक स्थिति का जायजा लिया जाता है। इस जांच के माध्यम से यह पता लगाया जता है कि गर्भ में पल रहा नवजात मेंटली रिटार्डिड है या नहीं। पीड़िता का अल्ट्रासाउंड भी किया गया, जिसमें शिशु की ग्रोथ का जायजा लिया गया।


आश्रय को मिली वार्डन
नारी निकेतन मामले के बाद गृह सचिव ने आश्रय अधिकारियों को वार्डन की नियुक्ति करने के आदेश दिए थे। जिसके बाद 1 जून को इंटरव्यू आयोजित की गई। पहले तो इस मामले के होने के बाद से यहां कोई आना ही नहीं चाहता था, लेकिन अब जीएमसीएच-32 के आला अधिकारियों ने वार्डन अप्वायंट कर लिया है। वार्डन कानपुर से हैं, जिसने अभी तक आश्रय ज्वाइन नहीं किया है। सूत्रों के अनुसार पहले वार्डन के लिए फाइनेंस विभाग में भेजी गई फाइल आगे नहीं बढ़ रही थी, लेकिन अब इसे अप्रूव कर जीएमसीएच-32 में भेज दिया गया है। इस पर जीएमसीएच-32 के निदेशक डॉ. राज बहादुर ने कहा कि फाइल अप्रूव हो चुकी है, वार्डन को अप्वायंट कर लिया गया है।

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