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सलाहकार समिति में नेता कम

प्रशासक की सलाहकार समिति में इस बार नेताओं को शायद कम जगह मिलेगी। सिफारिशी लोगों की दाल नहीं गलने जा रही है। नामों के बारे में आखिरी फैसला प्रशासक जनरल एसएफ रोड्रिग्स करेंगे, लेकिन सूत्रों का कहना है कि प्रशासन ने  करीब 22 नाम तय कर लिए हैं। इनमें वे लोग शामिल हैं, जिन्होंने शहर के विकास में योगदान दिया है।


पिछली सलाहकार समिति के भी कई लोगों को दोबारा जगह मिलेगी। सूत्रों का कहना है कि प्रशासन ने अभी तक जिन नामों को तय किया है, उनमें दुर्गादास फाउंडेशन के डायरेक्टर अतुल खन्ना, जानी मानी आर्कि टेक्ट नमिता सिंह और उद्योगपति कृष्ण गोयल का नाम शामिल है। चंडीगढ़ के पूर्व चीफ इंजीनियर वी के भारद्वाज को भी लिया जा रहा है। हरियाणा ऊदरू अकादमी के सचिव केएल जकिर व डॉक्टर प्रमोद कुमार के नाम भी तय कर लिए गए हैं।  


इसके अलावा पूर्व नौकरशाह राजन कश्यप को भी सलाहकार समिति में लिया जा रहा है। पूर्व मेयर हरजिंदर कौर भी समिति में बनी रहेंगी, जबकि चंडीगढ़ व्यापार मंडल को बहुत सालों के बाद प्रतिनिधित्व मिलने वाला है। व्यापार मंडल के अध्यक्ष चरणजीव सिंह को समिति में लेना तय है। पहले व्यापार मंडल के अध्यक्ष को सलाहकार समिति में लिया गया था, लेकिन  रेंट एक्ट लागू करने के विरोध में अध्यक्ष ने सलाहकार समिति से इस्तीफ दे दिया था, उसके बाद से पिछली सलाहकार समिति में इसका प्रतिनिधित्व नहीं था। डान वास्को नवजीवन सेंटर के सेबास्टियन जोस, लेफ्टिनेंट जनरल हरभजन सिंह, और एयर मार्शल आर के बेदी को भी दोबारा से समिति में जगह मिल रही है। रिटायर्ड आईपीएस वीके कपूर व बिग्रेडियर एमएल कटारिया के अलावा चंडीगढ़ वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष मंसूर अली भी समिति में हो सकते हैं।


रॉक गार्डन के निर्माता नेकचंद व पीके मुखर्जी को पहले की तरह से इसमें शामिल किया जा रहा है। इससे पहले 2007 में सलाहकार समिति का गठन किया गया था। मौजूदा कमेटी का कार्यकाल एक जनवरी 2009 को खत्म हो गया था, लेकिन उसके बाद से ही इसका गठन टल रहा था। गृह मंत्रालय के निर्देशों के बाद इसके गठन की प्रक्रिया को फिर से शुरू किया गया है। पुराने लोगों को दोबारा से मौका देने के बारे में एक अफसर का कहना है कि पिछली कमेटी में उनके अनुभव काम आएंगे। पिछली समिति में उन्हें ज्यादा काम करने का मौका भी नहीं मिल पाया था। समिति में आमतौर पर सभी बड़ी राजनीतिक दलों के अध्यक्ष परंपरा के तौर पर शामिल कर लिए जाते हैं। स्थानीय सांसद भी इसके सदस्य होते हैं।

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