class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

आंध्रप्रदेशः पहले सत्र की पहली उलझन

आंध्र प्रदेश की नवनिर्वाचित 13वीं विधानसभा का प्रथम सत्र इस माह हैदराबाद में लगभग उसी समय शुरू, हुआ जब दिल्ली में 15वीं लोकसभा का पहला सत्र। आंध्र प्रदेश विधानसभा का यह सत्र काफी नाटकीय और विवादास्पद रहा। कुछ नई बातें सामने आईं और कई दिलचस्प सवाल भी उठे। टेक्कली से कांग्रेस के निर्वाचित सदस्य के. रेवतीपथी का शपथ ग्रहण की पूर्व संध्या पर दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। इसके बाद अंधविश्वासी सदस्य भाग्य को लेकर तरह-तरह के सवाल पूछने लगे। वास्तव में शुरू में यह दुविधा थी कि विधायकों को निर्धारित समय पर शपथ दिलाई जाएगी या नहीं। ऐसी स्थिति में परंपरा को ध्यान में रखकर निर्णय लिया गया। 1999 में सत्तारूढ़ दल के विधायक रावी हरि बाबू की भी शपथ लेने से पहले एक सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। वह गुडीवाडा निर्वाचन क्षेत्र से चुने गए थे। सदन की बैठक से पहले तेलुगूदेशम पार्टी मुश्किल में थी। पिछली विधानसभा की तुलना में इस बार उसे दोगुनी सीट मिलीं। इसके बावजूद पार्टी विपक्ष में बैठी। अपने 26 साल के इतिहास में पार्टी के सामने पहली बार ऐसी स्थिति आई। इस बार पार्टी को 92 सीटें मिलीं, जबकि पिछली बार उसे 45 सीटें मिली थी। चुनाव परिणाम के बाद तेलुगूदेशम पार्टी ने विपक्ष में बैठकर सकारात्मक भूमिका निभाने का निर्णय लिया। लेकिन कांग्रेस पार्टी का दिवाकर रेड्डी को प्रो टेम अध्यक्ष बनाने का फैसला उसे मंजूर नहीं था, क्योंकि उन पर तेलुगूदेशम पार्टी के सदस्य परिताला रवीन्द्र की हत्या का आरोप है। मुख्य विपक्षी दल ने दिवाकर रेड्डी के नामांकन का विरोध करने का निर्णय किया, लेकिन राज्य विधानसभा की उच्च परंपराओं को देखते हुए उस पर अमल नहीं किया। रवीन्द्र की पत्नी सुनीता उस समय सदन से चुपचाप उठकर चली गई, जब शपथ लेने के लिए उनका नाम पुकारा गया। 2005 में उपचुनाव जीत कर उन्होंने अपने पति की राजनीतिक विरासत पाई थी। उन्होंने अगले दिन नवनिर्वाचित स्पीकर एन. किरण कुमार रेड्डी की उपस्थिति में शपथ ली।

वास्तव में सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी ने अध्यक्ष के लिए किरण कुमार रेड्डी का नाम चुनकर तेलुगूदेशम पार्टी के लिए एक और धर्मसंकट खड़ा कर दिया था। पिछली विधानसभा में कांग्रेस के मुख्य सचेतक रहे रेड्डी तेलुगूदेशम पार्टी के अध्यक्ष चन्द्रबाबू नायडू की आलोचना करते थे। तेलुगूदेशम पार्टी ने पहले उनके खिलाफ एक प्रत्याशी खड़ा करने और चुनाव कराने पर विचार किया, लेकिन निश्चित पराजय और विपरीत जन प्रतिक्रिया के भय से ऐसा नहीं किया। उप-सभापति के पद के लिए भी शायद यही कारण था। संसदीय परंपरा को देखते हुए उपाध्यक्ष का पद प्रमुख विपक्षी दल को जाना चाहिए, पर कांग्रेस ने अपना प्रत्याशी खड़ा किया। बाद में नादेनदला मनोहर सर्वसम्मति से उप-सभापति चुने गए।

दिलचस्प बात यह है कि अध्यक्ष और उपाध्यक्ष दोनों ही हैदराबाद के प्रसिद्ध निजम कॉलेज के पढ़े हुए हैं। इतना ही नहीं, दोनों कॉलेज में अच्छे खिलाड़ी भी थे। किरण कुमार क्रिकेट खेलते थे और उपाध्यक्ष टेनिस। उनसे बड़ी उम्मीदें हैं कि सदन की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाने में वे निष्पक्ष रहेंगे। लेकिन चुनाव के बाद पहले दिन सदन में जो देखा, वह इसके विपरीत था। मनोहर तिरंगा अंगवस्रम अपने कंधे पर डाल कर अपने आसन पर बैठे तो पार्टी-प्रचार के इस प्रदर्शन का दो दलों ने विरोध किया। उन्होंने कहा कि अध्यक्ष से निष्पक्ष व्यवहार की उम्मीद की जती है। विधायी मामलों के मंत्री के. रोसयिया ने यह कह कर विरोध रद्द कर दिया कि विधायकों के लिए कोई निर्धारित ड्रेस कोड नहीं है। इस पर मजलिस इताहदुल्ल मुसलीमीन (एमआईएम) ने कहा कि विधायकों के लिए ड्रेस कोड होना चाहिए, जबकि पार्टी के अंगवस्रम पर उन्हें विशेष ऐतराज नहीं था। एमआईएम के नेता अकबरुद्दीन ओवेसी ने सदन में युवाओं को देखते हुए सुझव दिया कि विधायकों को सदन में जींस और टी-शर्ट पहनने से बचना चाहिए।

इस समय सदन के 294 सदस्यों में से 147 पहली बार विधायक बने हैं, जो एक रिकॉर्ड है। दो नए राजनीतिक दलों- प्रजाराज्यम पार्टी और लोकसत्ता- ने पहली बार विधानसभा में प्रवेश किया है। समझा जा रहा था कि अभिनेता से नेता बने चिरंजीवी की प्रजाराज्यम पार्टी चुनाव में अच्छी टक्कर देगी, लेकिन यह तीसरे स्थान पर रही। इसके कुल 18 सदस्य चुनाव जीते। 2007 में राजनीति में आने से पहले लोकसत्ता पार्टी ने लगभग एक दशक तक स्वच्छ राजनीति के लिए सक्रिय भूमिका निभाई। इस पार्टी के अध्यक्ष ने नौवें दशक के मध्य में आईएएस की नौकरी छोड़कर भ्रष्टाचार मुक्त सार्वजनिक जीवन आंदोलन शुरू किया था। इस समय विधानसभा में वह पार्टी के एकमात्र प्रतिनिधि हैं, जबकि उनकी पार्टी को कई क्षेत्रों में उल्लेखनीय वोट मिले।

radhaviswanath73@yahoo.com
लेखिका वरिष्ठ पत्रकार हैं

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:आंध्रप्रदेशः पहले सत्र की पहली उलझन