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आखिर इतना बवाल क्यों?

सरकार महिलाओं को संसद व राज्य विधानमंडलों में 33 प्रतिशत आरक्षण दिलाने की बात तो कर रही है, पर संसद में जैसे ही इस विधेयक को पास कराने के लिए पेश किया जाता है, बवाल खड़ा हो जाता है। हमारे कुछ नेता अपने मन में शहीद होने की ख्वाहिश पालने लगते हैं। यह सच है कि महिलाओं को पुरुष के समकक्ष खड़ा करना है तो उन्हें आरक्षण देना होगा और हमें ख्याल भी रखना होगा कि पिछड़े वर्ग की महिलाओं का सर्वप्रथम विकास हो, क्योंकि आरक्षण का मूल उद्देश्य सभी वर्ग की महिलाओं को मुख्यधारा में शामिल करना है। किसी नेता व सरकार को बवाल खड़ा करने, मारने-पीटने एवं देश को संकट में डालने का अधिकार प्राप्त नहीं है।

शलेन्द्र कुमार, नेहरू विहार, दिल्ली

बगैर सिपाही के चौराहे

समस्त दिल्ली के अधिकांश चौराहे सिपाही के बगैर हैं, कहने का भावार्थ यह है कि जैसे पत्‍नी का स्वर्गवास होने पर पति की स्थिति हो जाती है, ठीक उसी तरह दिल्ली के अधिकांश चौराहे यातायात पुलिस के बिना हो गए हैं। वाहन चालक ट्रैफिक नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए दुर्घटनाएं कर रहे हैं। ऐसे में दिल्ली पुलिस पैदल यात्री सड़क सप्ताह मना कर पैदल यात्रियों के अधिकारों का सम्मान करने की बात कहे तो ये बात हजम नहीं होती। दिल्ली की सड़कों पर अतिक्रमण के कारण पैदल यात्रियों को सरेआम कुचला जा रहा हैं। यातायात महकमे को चुस्त-दुरुस्त बनाना चाहिए।

रोशन लाल बाली, महरौली, नई दिल्ली

ये जो पब्लिक है

एक कहावत है कि ‘अंधा बांटे रेवड़ी फिर-फिर अपने को दे।’ यह पांच वर्ष पूर्व सत्ताच्युत हुई बीजेपी पर अक्षरश: लागू होती है। बीजेपी ने एनडीए का अवतार लेकर 5-6 वर्ष सत्ता का रसास्वादन क्या कर लिया कि उन्होंने अपने आप ही, पीएम इन वेटिंग, पीएम इन कन्फर्म यहां तक कि चुनाव परिणाम पूर्व ही विभिन्न मंत्रालयों की जोड़-तोड़ तक कर डाली। और अब एक दूसरे को चोर कहने व इस्तीफे देने का नाटक चल रहा है। सत्ता सुख के लिए जीभ लपलपाना छोड़ जिम्मेदारी से विपक्ष की भूमिका में बैठे और संसद चलाकर, सरकार को जनहित के कामों के लिए मजबूर करके, फील गुड कराए।

एन. के. जैन, एस. डी. ए., नई दिल्ली

शिक्षा का बाजार

बिजनेसमैन, दलालों, भ्रष्ट राजनेताओं ने शिक्षा माफियाओं से मिलकर शिक्षा को बाजारू वेश्या बना दिया है। फिर, गरीब छात्र क्या करें। पैसे के अभाव में प्रतिभा दम तोड़ रही है। क्या सरकार को उन लाखों गरीब छात्रों के भविष्य की चिंता है, जिनके सपने तिल-तिल कर टूट रहे हैं? मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेजों में सीटों की नीलामी चल रही है। पैसे से डिग्री खरीद कर डॉक्टर और इंजीनियर बने छात्र समाजसेवा नहीं, बल्कि समाज को लूटेंगे। क्या मानव संसाधन विकास मंत्री के पास शिक्षा माफियाओं पर नकेल कसने के लिए कोई योजना है?

चक्रपाणि, न्यू अशोक नगर, दिल्ली

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