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बिहार पुलिस में शामिल होंगे दो हजार से अधिक दारोगा

बिहार में प्रति एक लाख की आबादी पर पुलिस कर्मियों के औसत के अंतर को पाटने की कोशिशें हो रही हैं। बिहार इस मामले में पड़ोसी राज्य झारखण्ड से भी पीछे है। राज्य में फिलहाल प्रति एक लाख की आबादी पर 57 सिपाही हैं। हालांकि बिहार से कट कर अलग हुए झारखण्ड में प्रति एक लाख की आबादी पर यह औसत 98 और राष्ट्रीय स्तर पर 126 का है। इस कमी को पाटने के लिए राज्य सरकार हर स्तर पर पुलिसकर्मियों की बहाली की प्रक्रिया चला रही है।

राज्य सरकार ने करीब 13 हजार सिपाहियों की बहाली का लक्ष्य रखा है। अगले कुछ महीनों में इसे पूरा कर लेने की कोशिशें हो रही हैं। इसके अलावा बिहार को 2100 नए सब इंस्पेक्टर भी मिल जाएंगे। 14 सौ से अधिक नव चयनित दारोगा की ट्रेनिंग चल रही है और जल्द ही करीब 700 और दारोगा ज्वाइन करेंगे। नई बहालियों के बाद राज्य में पुलिस कर्मियों की संख्या 77 हजार के ऊपर पहुंच जाएगी। होमगार्ड में भी नए रजिस्ट्रेशन होंगे। वैसे संगठित अपराध और नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन में आ रही दिक्कतों को देखते हुए अनुबंध पर सेना के रिटायर्ड जवानों को बिहार पुलिस ने सैप के रूप में बहाल कर रखा है। करीब दस हजार जवान हैं जिन्हें अलग-अलग मोर्चो पर तैनात किया गया है। रेडियो और वायरलेस में भी इन जवानों की मदद ली जा रही है। हाल ही में 48 सैप जवानों को अलग-अलग जिलों में इस काम में लगाया गया है।

एडीजी(मुख्यालय) नीलमणि के अनुसार सिपाहियों की नई बहाली के लिए केन्द्रीय चयन बोर्ड का भी गठन कर लिया गया है। ये बहालियां अब बोर्ड के मार्फत ही होंगी। इसके अलावा स्पेशल टॉस्क फोर्स (एसटीएफ) में भी 10 नई यूनिट शामिल की जाएंगी। एक यूनिट में दस जवान होते हैं और इस लिहाज से 400 और जवानों को एसटीएफ में शामिल किया जाएगा। एसटीएफ का इस्तेमाल फिलहाल नक्सल विरोधी ऑपरेशन और संगठित अपराध के खिलाफ ही होता है।

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