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दर दर पिटती राजधानी पुलिस

शहर में पुलिस का पिटना अब आम बात हो गई है।  वर्दी फटने व गिरेबान पकड़ने के आंकड़ों पर अगर गौर किया जाए तो साल भर में सात बार राजधानी पुलिस फटीचर हाल में दिखी है।


इस वर्ष के शुरूआत में राजपुर रोड पर शहर में पुलिस के मुखिया के घर के बाहर तेज रफ्तार बाइक सवार युवकों को रोकना पुलिस को भारी पड़ गया। नशे में धुत युवकों ने पुलिस कर्मी की पिटाई कर दी। इसी महीने चकराता रोड पर सत्ता के  नशे में चूर एक नेता के बेटे ने एक बुजुर्ग को टक्कर मार दी थी। ट्रैफिक पुलिस के जवान ने जब उसे रोका तो उसने उसके साथ सरेआम बदतमीजी कर डाली। इतना ही नहीं सीओ टैफिक  से भी अभद्रता की गई। अगस्त 2008 में दून चौराहे पर मुस्तैदी से डयूटी दे रहा एक ट्रैफिक जवान को पड़ा। रेड लाइट जंप कर रही एक नेता की गाड़ी को जब रोका गया तो जवान की वर्दी फाड़ दी गई। बाद में सत्ता के दबाव में सिपाही को सस्पेंड कर दिया गया। जुलाई 08 में तहसील चौक पर एक विक्रम चालक ने कोतवाली के एक जवान को बुरी तरह पीट डाला था। इस घटना से कुछ दिन पूर्व ही एक और विक्रम चालक ने सीओ ट्रैफिक के साथ भी अभद्रता की थी।

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