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चंद्रशेखर आजद कृषि विश्वविद्यालय का अनूठा फैसला

चंद्रशेखर आजाद कृषि विश्वविद्यालय में आने वाले सत्र में सभी नये पुराने छात्रों को एक शपथ पत्र देना होगा कि वह महाविद्यालय परिसर में किसी तरह के लड़ाई-झगड़े में शामिल नही होंगे और न ही कोई ऐसा काम करेंगे जिससे महाविद्यालय की संपत्ति को नुकसान पहुंचे। इसके बाद भी कोई छात्र अगर इस तरह की घटना में शामिल होगा तो उसके खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जायेगी। छात्रों से इसी तरह का एक शपथपत्र रैगिंग के बारे में भी लिया जाएगा, जिसके मुताबिक अगर कोई छात्र रैगिंग में शामिल होगा तो उसके खिलाफ भी कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।


विश्वविद्यालय के कार्यवाहक उपकुलपति प्रो एच.के. सहगल ने बताया कि विश्वविद्यालय परिसर में छात्रों की हिंसा से जुड़ी कोई भी हरकत बर्दाश्त नहीं की जायेगी और इसको रोकने के लिये हरसंभव प्रयास किये जायेंगे। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय परिसर में छात्र पढ़ने आते है न कि हिंसा करने और कैम्पस को नुकसान पहुंचाने। गौरतलब है कि पांच जून की रात को चन्द्रशेखर आजाद कृषि विश्वविद्यालय का बीएसएसी कृषि तृतीय वर्ष का छात्र सुनील यादव खाना खाकर भगतसिंह छात्रावास के बाहर टहल रहा था। अचानक उसकी तबियत खराब हो गयी, उसे उल्टियां होने लगी और वह गिर पड़ा। छात्रावास के अन्य छात्र यादव को लेकर डीन के घर गये और उनसे एंबुलेंस मांगी। एंबुलेस आने में विलंब के चलते यादव को एक टैम्पो में डालकर अस्पताल ले जाया गया, जहां रात करीब बारह बजे उसकी मौत हो गई।


साथी की मौत से गुस्साये छात्रों ने संस्थान में खूब तोड़फोड़ और आगजनी की। इस तोड़फोड़ में विश्वविद्यालय की एम्बुलेंस तथा आधा दजर्न अन्य वाहन टूटे इसके साथ-साथ चार प्रोफेसरों के घर को और सामान को भी नुकसान पहुंचा। छात्रों ने पथराव भी किया था जिसमें पुलिस कर्मियों सहित करीब आधा दजर्न लोगों को मामूली चोटें भी आई थीं।


बाद में पुलिस ने इस मामले में विश्वविद्यालय के सैकड़ों अज्ञात छात्रों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले की जांच के लिये एक जांच समिति भी बनाई थी जिसने विश्वविद्यालय की करीब आठ लाख रुपये की संपत्ति के नुकसान का आकलन किया था। इस घटना के बाद विश्वविद्यालय को अनिश्चितकाल के लिये बंद कर दिया गया था तथा छात्रों से छात्रावास खाली करा लिये गये थे। जिला प्रशासन ने विश्वविद्यालय परिसर में भारी पुलिस तैनात कर दी थी और घटना की मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दिये गये थे।


छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के उपकुलपति और चन्द्रशेखर आजाद कृषि विश्वविद्यालय के कार्यवाहक उप कुलपति प्रो. सहगल ने कहा कि हमारा उद्देश्य छात्रों के भविष्य को नुकसान पहुंचाना नहीं है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने फैसला किया है कि जिन छात्रों के अंतिम वर्ष की परीक्षा को विश्वविद्यालय की बंदी के कारण टाल दिया गया था उन्हें 23 जून से एक बार फिर परीक्षाएं देने का मौका मिलेगा। परीक्षायें समाप्त होते ही छात्रों को वापस घर भेज दिया जायेगा । अन्य छात्रों की भी छूटी हुई परीक्षाएं करवाने के लिये कार्यक्रम बनाया जा रहा है। लेकिन भविष्य में ऐसी हिंसा की घटनाएं न हो इसके लिये विश्वविद्यालय प्रशासन ने हलफनामे लेने की व्यापक रणनीति बनाई है।

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