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पहले पढ़ाई, फिर शुटिंग

पहले पढ़ाई, फिर शुटिंग

बाल अभिनेत्री इशिता की आयु मात्र 10 वर्ष है। इस उम्र में वह सीरियल, फिल्म एवं मॉडलिंग क्षेत्र में धूम मचाए हुए है। राजश्री प्रोडक्शन के बैनर तले निर्मित पारिवारिक ‘एक विवाह ऐसा भी’ में उसने ईशा कोप्पिकर की छोटी बहन संध्या की अहम भूमिका अभिनीत की थी। इशिता बचपन से सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं में भाग लेती रही है। वह श्यामक डावर डांस अकादमी में पिछले दो वर्षो से नृत्य सीख रही है। यहीं से उसकी पहचान एड फिल्म्स मेकर्स से हुई। वह टीवी 18 के लिए स्कूल बैग की मॉडलिंग कर चुकी है। फिल्म्स एंड शॉट्स की अनेक विज्ञापन फिल्मों में भी वह  मॉडल बनी है। छोटे पर्दे पर उसे लाने का श्रेय बालाजी टेली फिल्म्स को है। एकता कपूर के धारावाहिक के लिए जब उसने ऑडिशन दिया तो वह पहली बार में ही सफल रही। ‘कहानी घर-घर की’ सीरियल से इशिता दर्शकों के दिलों तक पहुंची। ‘नागिन’ सीरियल में अरुणा ईरानी की बेटी के रोल में भी वह सराही जा रही है। इसमें नेगेटिव रोल था। इसने उसे अच्छे से प्रस्तुत करने का प्रयास किया।
‘अम्बर धारा’ में उसने अम्बर की भूमिका में खूब वाह-वाही लूटी है। वह सीरियल अभी भी चैनल पर प्रसारित हो रहा है। राजश्री प्रोडक्शन के बैनर तले निर्मित सहारा चैनल पर प्रसारित धारावाहिक ‘वो रहने वाली महलों की’ में वह रानी के किरदार में दर्शकों द्वारा पसंद की जा रही है। इसमें उसने ऐसी लडम्की का रोल अदा किया है, जो अनाथ है।  ‘मां वैष्णोदेवी’, ‘चलती दा नाम गड्डी’, ‘घर एक सपना’ भी उसके लोकप्रिय धारावाहिक रहे हैं। कलर्स चैनल पर उसके दो सीरियल शुरू होने को हैं। पांचवीं कक्षा की छात्रा इशिता अपने स्कूल की होनहार बालिका है। वह पढ़ाई में काफी होशियार है। नियमित रूप से स्कूल जाना उसे पसंद है। शूटिंग का काम वह अवकाश के दिनों में ही करती है। मई-जून में वह बड़े बैनर की फिल्मों में व्यस्त हो गई है। उसकी बड़ी होकर डॉक्टर बनने की इच्छा है, मगर एक्टिंग के शौक को वह बरकरार रखेगी। वह भारतीय शास्त्रीय कथक डांस भी सीख रही है। खेलकूद के क्षेत्र में भी वह सक्रिय है। स्केटिंग और स्वीमिंग वह नियमित करती है। ड्राइंग और क्राफ्ट्स में भी उसकी रुचि है। उसे हिंदी, अंग्रेजी व गुजराती भाषा अच्छे से आती है। वह कहती है कि ‘बॉलीवुड में बाल फिल्मों का अभाव है। सैकडमें फिल्मों में से मात्र दस की संख्या ही होती है बाल फिल्मों की। क्या हमारे पास बाल प्रतिभाओं की कमी है, जो अब एनिमेशन फिल्मों की भेड़-चाल शुरू हो चुकी है। चुनींदा लोग ही हैं, जो बच्चों के लिए फिल्म-सीरियल बना रहे हैं।’

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