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भावनाओं पर रखें नियंत्रण

अक्सर लोग अनजाने भय का शिकार बन जाते हैं। इस स्थिति को मनोविज्ञान की भाषा में पैरानॉय कहते हैं। किंग्स कालेज लंदन के मनोविज्ञान संस्थान के एक दल ने 1200 लोगों के साक्षात्कार से यह पता लगाना चाहा है कि क्या वे ऐसा सोचते हैं कि कोई दूसरा उन्हें नुकसान पहुंचा रहा है? शोधकर्ताओं का कहना है कि यदि भावावेशों पर नियंत्रण नहीं पाया गया तो इससे वास्तव में तनाव बढ़ सकता है। अध्ययन से यह भी पता चला है कि इसमें से कई लोग अनावश्यक रूप से भयाक्रांत हैं। लोग उन बातों को लेकर नाहक ही परेशान होते हैं, जो हुई ही नहीं।

परिणाम और उपचार

मनोचिकित्सक से संपर्क
बिहेवियर थैरेपी
सेल्फ हैल्प तकनीक

अब तक लोग भय दूर करने के बारे में तरीके नहीं जानते थे, लेकिन इन दिनों कई प्रभावशाली तरीके सामने आए हैं। जैसे व्यवहार, उपचार और सेल्फ-हेल्प तकनीक। दरअसल, लोगों को यह जानने की आवश्यकता है कि इस तरह के विचार कोई अनोखे नहीं हैं और इनसे खौफ नहीं खाना चाहिए। बहुत-से लोग अंतमरुखी होते हैं। किसी के समक्ष जाने या बात करने में संकोच करते हैं। शर्माते हैं, लेकिन अब ऐसे लोगों की हिचक दूर कर उन्हें बोल्ड बनाने की दवाएं भी निकल आई हैं।

खुल जाएगा दिमाग

यूनिवर्सिटी ऑफ ज्यूरिख के शोधकर्ताओं ने ऐसा स्प्रे तैयार किया है, जो ऑक्सीटॉसिन का काम करता है। ये ऐसा हार्मोन है जो दिमाग में न्यूरोट्रांसमीटर के रूप में काम करता है। यह दिमाग में जाकर किसी से बातचीत करने में हिचक को खत्म करता है।

सेरोजट नामक इस लाइफस्टाइल दवा को शुरू में डिप्रेशन के इलाज का लाइसेंस मिला था। ब्रिटिश सरकार ने शर्मीलेपन और सामाजिक भय के इलाज के लिए इस दवा को प्रयोगार्थ लाइसेंस प्रदान किया है।

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