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चार दशक बाद भी नहीं मिली यातायात सुविधा

1971 से प्रस्तावित 70 किलोमीटर गोपेश्वर उर्गम मारवाड़ी मोटर मार्ग अभी तक मात्र 12 किलोमीटर ही पूर्ण हो पाया है। सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इस क्षेत्र के लोगों का कहना है कि अब यातायात सुविधा उनके लिए दूर के ढोल सुहावने कहावत की तरह हो गए हैं।


1971 में आई बेलाकुची की बाढ़ के बाद अलकनंदा नदी की दाहिनी ओर बसे कुजऊं, मैकोट, झड़ेता, स्यूंण, डुमक, कलगोठ, किमाणा, जखोला, पल्ला आदि गांवों को यातायात सुविधा से जोड़ने के लिए यह मोटर मार्ग प्रस्तावित हुआ था। जिसका समरेखण भी हो चुका था। तब यह मार्ग क्षेत्र की सामरिकता व विकास को देखते हुए वैकल्पिक मार्ग माना जा रहा था। लेकिन 70 किलोमीटर प्रस्तावित इस मोटर मार्ग की लंबाई भी अब कम कर दी गई है। कुजऊं तक 12 किलोमीटर यह मार्ग बन चुका है। जबकि इस मार्ग को अब मारवाड़ी छोड़कर गोपेश्वर, बेमरू उर्गम तक ही प्रस्तावित कर छोटा कर दिया गया है। अब यह मार्ग पीएमजीएसवाई के फेज नंबर 6 में फिलहाल कुजऊं मैकोट से आगे कलगोठ तक स्वीकृत किया गया है जिसके के लिए 11.20 करोड़ रूपये भी स्वीकृत हो चुके हैं। किंतु तीन वर्षो से वन भूमि हस्तांतरण ही नहीं हो पाया है।

ग्रामीण प्रेम सिंह सनवाल का कहना है कि मोटर मार्ग का निर्माण न होने से डुमक, कलगोठ, किमाणा, जखोला व स्यूंण जैसे दूरस्थ गांवों में खाद्यान्न खच्चरों के द्वारा 350 रूपया प्रति खच्चर भाड़ा देकर पहुंचाया जा रहा है। स्थानीय कृषि उत्पाद भी इसी भाड़े की बलि चढ़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली व दूरसंचार की स्थिति भी इस क्षेत्र में कमोवेश ऐसी ही है। प्रेम सिंह सनवाल ने बताया कि डुमक जूनियर हाईस्कूल के अध्यापक माह में एक सप्ताह विद्यालय खोलते हैं। यहां तैनात तीन अध्यापक कभी भी एक साथ नहीं देखे गए। कहा कि प्राथमिक विद्यालय भी शिक्षामित्र के भरोसे संचालित हो रहा है। स्वास्थ्य के नाम पर किमाणा और डुमक में आयुव्रेदिक चिकित्सालय तो हैं पर डाक्टरों व कर्मचारियों की तैनाती अभी तक नहीं हो पाई है। सनवाल ने बताया कि 8 वर्ष पूर्व डमक व कलगोठ का कागजी विद्युतीकरण हो चुका है। लेकिन यहां निर्मित विद्युत लाईन पर अभी तक बिजली की धारा प्रवाहित नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि इन तमाम समस्याओं को लेकर ही इस बार लोकसभा चुनाव का बहिष्कार किया गया। लेकिन अभी भी उनकी इन समस्याओं को कोई नहीं देख रहा है। सनवाल ने कहा कि यदि तत्काल क्षेत्र की इन समस्याओं को त्वरित न निपटाया गया तो क्षेत्र के दजर्नों गांवों के लोग एक बार फिर सड़कों पर उतरेंगे।

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