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विश्व कप से बाहर

भारतीय क्रिकेट टीम के टवेंटी20 विश्व कप से बाहर हो जाने से कई लोग प्रसन्न हैं। इनमें कई पत्रकार हैं। ऐसा नहीं है कि ये पत्रकार देशभक्त नहीं हैं लेकिन उनकी बात में दम है।

अगर भारत विश्व कप जीत जाता तो क्या होता? सबसे बड़ा खतरा तो यह होता कि ललित मोदी साल में बारह आईपीएल की घोषणा कर देते, पता लगता कि उत्तरी ध्रुव से लेकर पापुआ न्यू गिनी में आईपीएल हो रहे हैं।

आखिरकार पर्यावरण को इससे कितना नुकसान होता। हमारी भारतीय जनता को क्रिकेट से इतना प्रेम है कि भारतीय क्रिकेटर टीवी पर दिख जाएं, तो उनके कदम ठिठक जते हैं। अगर साल के 365 दिन आईपीएल होता तो देश में और कुछ न होता। हमारी अर्थव्यवस्था पाकिस्तान से भी बुरी हालत में पहुंच जती। पाकिस्तान को तो अमेरिका ढेर सारा पैसा दे रहा है, हमें तो वह भी नहीं मिलता।

पत्रकार मित्रों की समस्या एक और है। अगर भारत विश्व कप जीत जाता तो हमें पत्रकारिता को तार-तार होते देखना होता। सारे टीवी चैनलों पर लगातार भारतीय क्रिकेट टीम की जय जयकार होती। कहीं धोनी के कुत्ते का इंटरव्यू होता तो कहीं रोहित शर्मा की बिल्ली का। पशुओं के अधिकारों के लिए सक्रिय लोगों का कहना है कि इस बात में कुत्ते बिल्लियों के अपमान की गंध आती है। ये कुत्ते बिल्लियां चैनल के एंकरों से ज्यादा समझदारी की बात करते। इसके अलावा कोई उत्साही पत्रकार ईशांत शर्मा के बाल काटने वाले सलून के किसी कारीगर से पूछता कि ईशांत के बालों की लंबाई कितनी है, जब वह बता देता तो अगला सवाल होता कि उसके सिर पर बाल कितने हैं। ईशांत के बालों की गंभीर चर्चा तब तक चलती जब तक गौतम गंभीर के नाखूनों की लंबाई के बारे में विचारोत्तेजक बहस लेकर दूसरा रिपोर्टर न आ जाता। कम से कम चार पांच दिन ऐसा टीवी पर चलता। अगर इन्हीं सब बातों को कागज पर उतार लिया जए तो अखबारों, पत्रिकाओं के बारे में भी जना ज सकता है।

इसके अलावा विजय जुलूस होता, जिसमें लाखों लोग सड़कों पर खड़े हो जते और चार-छह घंटे का ट्रैफिक जम हो जता। विजेता टीम का स्वागत समारोह होता, जिसमें बीसीसीआई के सारे लोग विजय वर्ग से फूले नजर आते।

वे तमाम खिलाड़ियों को एक-एक करोड़ रुपए के ईनामों की घोषणा करते। क्रिकेटर फिल्म सितारों के साथ तस्वीरें खिंचाते, उनके विज्ञापनों की तादाद बढ़ जती। इसके बावजूद कि उन्हें पद्मश्री लेने के लिए राष्ट्रपति भवन जने की फुरसत नहीं है, उन्हें पद्मभूषण, पद्मविभूषण या भारत रत्न तक देने की कोशिश होती।

सोचिए, इस बार देश किन-किन चीजों से बच गया है।

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