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तबादला सूची आउटसोर्स होने से डाक्टरों की परेशानी बढ़ी

डाक्टर मरीज से ज्यादा अपने तबादले को लेकर चिन्तित है। इसी महीने उनका तबादला होना है। स्वास्थ्य विभाग कम्प्यूटर पर तबादले वाले डाक्टरों की सूची बना रहा है। दूरदराज के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में तैनात डाक्टरों की चिन्ता इसी सूची को लेकर है।

किस जिले में स्थानांतरण किया जा रहा है, यह सबसे अधिक चिन्ता का विषय है। मरीजों की भीड़ के बीच वे सचिवालय के बाबुओं से लगातार संपर्क बनाये हुए हैं। पर परेशानी यह है कि तबादला की सूची बनाने का काम इस बार सचिवालय के बाबुओं के हाथ से निकल गया है।

राज्य स्वास्थ्य समिति ने इसे आउटसोर्स कर दिया है। वैसे तो सामान्यतया तीन वर्षो में तबादला का प्रावधान है। पर स्वास्थ्य विभाग ने इस बार इसकी सीमा साढ़े पांच साल कर दी है। विभागीय सूत्रों की मानें तो 31 दिसम्बर 2003 के पहले से जो डाक्टर एक जगह पदस्थापित हैं उन्हीं का तबादला होना है। इसी सूची में भी ‘वरीयता कम च्वॉयस’ का पूरा ध्यान रखा जा रहा है।

स्वास्थ्य विभाग ने तबादला चाहने वाले डाक्टरों से च्वॉयस पोस्टिंग के लिए आवेदन मांगा था। हालांकि जिन डाक्टरों ने च्वॉयस पोस्टिंग के लिए आवेदन नहीं दिया है और वे 31 दिसम्बर 2003 के पहले से एक ही जगह पदस्थापित हैं उनका भी नाम तबादला वाली सूची में शामिल किया गया है। इसके तहत करीब 900 डाक्टरों का तबादला होना है।

फिलहाल स्वास्थ्य विभाग में 3000 डाक्टर काम कर रहे है जबकि कैडर पोस्ट 6200 है। डाक्टरों के 3200 पद फिलहाल खाली हैं। इसमें कुछ पदों पर कांट्रेक्ट डाक्टरों से काम चलाया जा रहा है। हालांकि बिहार राज्य स्वास्थ्य सेवा संघ (भासा) का मानना है कि सरकार ईमानदारी और पारदर्शिता से अपने ही बनाये नियम का पालन करे तो स्वास्थ्य सेवा और डाक्टर दोनों का हित होगा।

भासा के सचिव डा. दिनेश्वर सिंह और संयोजक डा. अजय कुमार ने बताया कि सरकार एक बार सभी डाक्टरों का च्वॉयस पोस्टिंग कर दे तो कार्य स्थल पर डाक्टरों की 24 घंटे सौ फीसदी उपस्थिति संभव होगी।

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  • Web Title:मरीज से ज्यादा तबादले पर नजर