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संसद में भी गूंजा मिशन ग्रेजूशन

दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रवेश को लेकर छात्रों की चिंता ने विधानसभा में भी हलचल पैदा कर दी है। इस मुद्दे पर जहां विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी सरकार को घेर रही है, वहीं सत्ता पक्ष के लोग बचाव की मुद्रा में हैं। सत्ता पक्ष के विधायक भी मांग कर रहे हैं कि कॉलेजों में सांध्यकालीन सत्र शुरू किए जाने चाहिए।


 उपराज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान विपक्ष के नेता विजय कुमार मल्होत्रा ने सूचना के अधिकार कानून के तहत मांगी गई सूचना का हवाला देते हुए कहा कि पिछले दस साल में दिल्ली में सरकार ने अपना कोई भी कॉलेज नहीं खोला है, डीम्ड विश्वविद्यालय जरूर खुले हैं। इस वजह से हजरों छात्र, जिनमें गरीब छात्र अधिक होते हैं, कॉलेजों में सीटें न होने या पास प्रतिशत अधिक होने के कारण आगे पढ़ाई नहीं कर पाते। उन्होंने कहा कि यदि सरकार नए कॉलेज नहीं खोलने चाहती है तो कम से कम सभी कॉलेजों में सांध्यकालीन कक्षाएं तो शुरू की ही जा सकती हैं।


इससे पहले सत्ता पक्ष के वरिष्ठ विधायक डा. नरेंद्र नाथ भी यह मांग सदन के समक्ष रख चुके थे। सरकार की उपलब्धियों का बखान करते-करते डा. नाथ ने अपने सुझव रखा कि कई छात्र कॉलेजों में दाखिले से वंचित रह जाते हैं, इसलिए सभी कॉलेजों में सांध्यकालीन सत्र शुरू किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर दिल्ली के ही केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल के समक्ष यह मुद्दा रखा जा सकता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सिब्बल इस पर अपनी सहमति जता देंगे। हालांकि विजय कुमार मल्होत्रा ने इसे राज्य सरकार का मामला बताया कि इसके लिए केंद्रीय मंत्री के पास जाने की जरूरत नहीं है।

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