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कुत्ते वाली आंटी

लावारिस और अनाथ बच्चों को पालने वाले अक्सर दिखाई पड़ जाते हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक महिला को आवारा कुत्तों को अपने बच्चे की तरह पालने का अनूठा शौक है। इस्लामिया कॉलेज के पास गिरजाघर परिसर में रहने वाली शिरीन महावीर को उनके इसी शौक के कारण आसपास के लोग 'कुत्ते वाली आंटी' भी कहते हैं।

उनके घर में दर्जनों आवारा कुत्तों का बसेरा है। वह कहती हैं, 'ये किसी और के लिए कुत्ते होंगे, मेरे लिए तो बच्चे हैं।' बहत्तर साल की अविवाहित कुत्ते वाली आंटी इन बच्चों के पालन पोषण के लिए किसी से मदद नहीं लेती बल्कि उन्हें मिलने वाली पेंशन से उनकी देखभाल करती हैं।


नारी शिक्षा निकेतन में अध्यापक रही सुश्री शिरीन की पगार भी इन्हीं कुत्तों पर खर्च होती थी। वह कहती हैं कि परिवार में कोई रहा नहीं ऐसे में ये बच्चे ही उनका सहारा हैं। इनमें से किसी की बीमारी इनसे देखी नहीं जाती। वह कहती हैं कि अगर इनमें से कोई बीमार हो जाता है तो उनका सुकून छिन जाता है। शिरीन कुत्तों के हाव-भाव को बखूबी समझती हैं। कुत्ते भी उनके इशारे को पलक झपकते ही समझ जाते हैं।

उन्होंने बताया कि वह अपने इन बच्चों को सुबह नाश्ते में दूध और ब्रेड देती हैं, जबकि दोपहर में पूरा भोजन कराती हैं। दोपहर के बाद चार बजे के करीब इन्हें एक बार फिर हल्का नाश्ता कराया जाता है और रात में भोजन देकर सुला दिया जाता है। कुत्ते उनसे इतना घुल मिल गए हैं कि कभी-कभी तो ये उनके सिर पर भी चढ़ जाते हैं।

शिरीन के घर के पास रहने वाले राजाराम का कहना है कि उन्हें कुत्तों से इतना लगाव है कि उनके पास रहने वाले कुत्तों में से यदि कोई ना दिखाई पड़े तो अपनी बढ़ी उम्र और बुढ़ापे की परेशानियों को दरकिनार करते हुए वह आसपास की गलियों में उसे ढूंढने लगती हैं। श्री राजाराम ने बताया कि इन आवारा कुत्तों का वह स्वयं इलाज भी करती हैं। कुत्तों को नहलाना धुलाना तो उनकी सामान्य आदत में शामिल हो गया है।

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