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एफबीटी के प्रावधानों को नरम कर सकते हैं प्रणव

एफबीटी के प्रावधानों को नरम कर सकते हैं प्रणव

वित्त मंत्रालय वेतनेतर लाभ कर (फ्रिंज बेनिफिट टैक्स) के प्रावधानों को लचीला बनाने पर विचार कर रहा है जिससे कंपनियों द्वारा कर्मचारियों को दिये जाने वाले वाले कुछ वेतनेतर लाभों और भत्तों को इस कर के दायरे से निकाला जा सकता है। 

हालांकि एक तरफ उद्योग जगत फ्रिंज बेनिफिट टैक्स (एफबीटी) को आगामी बजट में पूरी तरह समाप्त करने की मांग कर रहा है पर सूत्रों ने कहा कि वित्त मंत्रालय खजाने की दृष्टि से इस कर को पूरी तरह समाप्त करने के मूड में नहीं है।   

बहरहाल, सूत्रों ने कहा कि मंत्रालय एफबीटी के प्रावधानों को लचीला बनाये जाने पर विचार कर रहा है। मंत्रालय उन विविध मदों पर व्यय की जाने वाली राशि को इससे अलग रख सकता है जिससे कर्मचारियों को प्रत्यक्ष रूप से लाभ नहीं होता है।

सूत्रों के अनुसार कंपनियों की ओर से विपणन और बिक्री संवर्धन से संबंधित कर्मचारियों पर किए जाने वाले व्यय को एफबीटी के दायरे से अलग रखा जा सकता है क्योंकि इससे कर्मचारियों को प्रत्यक्ष रूप से कोई लाभ नहीं होता है।

अर्न्स्ट एंड यंग के वरिष्ठ सहयोगी सत्य पोद्दार ने कहा कि सरकार के लिये बेहतर चीज यह है कि वह एफबीटी को पूरी तरह समाप्त कर दे। 
   

गौरतलब है कि वित्त वर्ष 2005-06 में पेश बजट में तत्कालीन वित्त मंत्री पी  चिदंबरम ने एफबीटी शुरू किया था।  मौजूदा प्रावधान के तहत एक कर्मचारी को वेतनेत्तर लाभ पर 30 फीसदी एफबीटी देना पड़ता है। 

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