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‘कच्चातिवू में श्रीलंकाई बेस पर जवाब दे केंद्र’

‘कच्चातिवू में श्रीलंकाई बेस पर जवाब दे केंद्र’

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम करुणानिधि ने कहा है कि भारत को कच्चातीवू में श्रीलंका के सैन्य आधार शिविर बनाने की रिपोर्ट्स का सत्यापन करना चाहिए क्योंकि श्रीलंका का यह कदम प्रदेश सरकार और मछुआरों के लिए चिंता का सबब हो सकता है। कच्चातीवू द्वीप भारत ने 1974 में श्रीलंका को सौंप दिया था।

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को लिखे अपने पत्र में करुणानिधि ने तमिल अखबारों की उन रिपोर्ट्स पर ध्यान दिलाया है, जिनमें कहा गया था कि श्रीलंकाई नौसेना द्वीप में सैन्य आधार शिविर बनाने के साथ वाच टावर लगाने जा रही है। पत्र में कहा गया है कि भारत सरकार को अपनी एजेंसियों के माध्यम से रिपोर्ट्स का सत्यापन करना चाहिए।

संप्रग के एक अहम घटक द्रमुक प्रमुख करूणानिधि ने कहा है कि श्रीलंकाई नौसेना द्वारा तमिल मछुआरों के शोषण की घटनाएं लगातार सामने आती रहती हैं। प्रदेश सरकार इस संबंध में कई बार निवेदन कर चुकी है और श्रीलंका के अधिकारी बार-बार ऐसा न होने का आश्वासन भी देते हैं, लेकिन फिर भी लगातार ऐसा हो रहा है।

प्रदेश के मछुआरे कथित तौर पर अक्सर श्रीलंका की नौसेना के हमलों का शिकार होते रहते हैं। इसके चलते अन्नाद्रमुक समेत कई पार्टियां इस द्वीप को दोबारा अपने कब्जे में लेने की मांग कर चुकी हैं। करुणानिधि ने पत्र में कहा है कि श्रीलंका सेना गरीब मछुआरों की नावों को नष्ट करने के साथ उनके जाल जब्त कर लेती है।  पत्र की एक प्रति मंगलवार रात जारी की गई।

उन्होंने कहा कि 15 जून को हुई एक घटना में कच्चातीवू के पास मछुआरों को श्रीलंका सेना ने घेर लिया और उनके जाल जब्त कर उन्हें धमकाया। इस घटना में एक नाव डूब गई। उन्होंने कहा इस घटना ने रामेश्वरम के मछुआरों में असुरक्षा का भाव पैदा कर दिया है।

दोनों देशों की 26 अक्टूबर को हुई संयुक्त वार्ता की ओर ध्यान दिलाते हुए उन्होंने कहा कि इसमें दोनों देश इस बात पर राजी हुए थे कि वे मछुआरों के इंटरनेशनल मेरीटाइम बाउंड्री लाइन (आईएमबीएल) के पार करने पर उनके साथ सदाशयता का व्यवहार करेंगे। उन्होंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि वे श्रीलंका सरकार को कूटनीतिक स्तर पर लिए निर्णयों का उल्लंघन न करने और तमिलनाडु के मछुआरों का शोषण न करने को कहें।

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