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ताकि आप खड़े हों अपने पैरों पर

पैड यानी पेरिफॅरल आर्टिरियल डिजीज होने पर किसी भी शख्स को अपने पैरों पर खड़ा होने में गहरी पीड़ा और परेशानी होती है। ये बीमारी शरीर में वसा और कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ जाने की वजह से होती है, लेकिन इसका ताल्लुक दिल या दिमाग से बिलकुल नहीं है। आपको मालूम होगा कि दिल और दिमाग के अलावा, हमारे बाकी शरीर में भी खून की धमनियों का जाल बिछा रहता है, जिसमें होने वाले रक्त संचार की बदौलत ही सभी अंग-प्रत्यंग ठीक से काम करते रहते हैं।

पैड नाम की बीमारी में होता ये है कि खून की धमनियों की भीतर की दीवार पर फैट या कोलेस्ट्रॉल की मोटी परत चढ़ जाती है, जिससे रक्त संचार में भारी रुकावट आ जती है। धमनियों में खून की सप्लाई कम या बंद होने पर वैसे तो सारे शरीर पर ही विपरीत असर पड़ता है, लेकिन सबसे ज्यादा असर पांवों पर पड़ता है। इस बीमारी में चलते समय पांवों में तेज दर्द, ऐंठन, सूजन या पांव सुन्न हो जाने की शिकायत हो जती है। अगर इसकी परवाह न की जाए तो आराम करते वक्त भी पंजों में तेज दर्द होने लगता है। यही नहीं, पैर की धमनियों में पर्याप्त खून न होने पर टिश्यू खत्म होने लगते हैं और गैंग्रीन भी हो सकता है, जिससे पैर काटने की नौबत आ जाती है।

पैड के लक्षण

- हरदम पैरों में तेज दर्द और जलन होती रहती है। रात में सोते समय पंजों में दर्द और बढ़ जाता है, क्योंकि पैर लेटा रहता है। 
- पंजे काले पड़ने लगते हैं। 
- घाव और फोड़े-फुंसी जल्दी ठीक न होना।
- पैदल चलते समय जंघों, पिंडलियों और कूल्हे में दर्द और पांव में ऐंठन होना।

क्यों होता है ये रोग

- दिल और दिमाग की धमनियों को छोड़कर शरीर की अन्य धमनियों में कोलेस्ट्रॉल या फैट जमा हो जाने पर।   

- तनाव और सिगरेट की वजह से। इनके कारण भी खून की धमनियां सिकुड़ जाती हैं और संबंधित हिस्से में रक्त संचार कमजोर पड़ जाता है। 

- डायबिटीज के मरीज में जब ब्लड शुगर का लैवल हाई हो जता है, तो इससे खून की धमनियां डेमेज हो जाती हैं।
-इसके अलावा उम्र बढ़ने के साथ भी रक्त धमनियों में सिकुड़न और टिश्यू खत्म होने की समस्या पैदा होने
लगती है।

क्या है इलाज ?

पैड का पता चलने के साथ ही डॉक्टर की राय से डोपलर अल्ट्रा सोनोग्राफी करवाएं, ताकि पता चल सके कि रक्त संचार में कहां रुकावट आ रही है। अगर मामला सीरियस है, तो डॉक्टर आर्टिरियोग्राफी भी करवाने को कहेंगे। इसमें दिल की एंजियोग्राफी की तरह कैथेटर डालकर छोटी सी सजर्री की जाती है। इसके जरिए धमनी में बैलून और स्टैंट लगाए जाते हैं। कई बार ग्राफ्टिंग या बाइपास सजर्री भी करनी पड़ती है। इसके साथ ही आपको डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाएं खानी होंगी, और कुछ सावधानियां भी बरतनी होंगी।

पैड के मरीज को खानपान की आदत बदलनी पड़ती है, जिससे कि कोलेस्ट्रॉल कम हो। भारी वजन वाले मरीजों को हाई कैलोरी भोजन छोड़ना पड़ता है। इसके अलावा रोजना कसरत और मोटापा कम करने की कोशिश करनी चाहिए, ताकि ब्लड सकरुलेशन में सुधार आ सके। अगर मरीज को डायबिटीज है, तो पांव में चोट या कट नहीं लगे, इसका ध्यान रखना जरूरी है। टाइट शूज पहनना भी छोड़ दें। ब्लड शुगर लैवल कंट्रोल में रखें। स्मोकिंग की आदत है, तो उसे छोड़े बगैर धमनियों में खून का संचार सुधारना लगभग नामुमकिन है।

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