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बदन की गंध

ऑर्गेनिक फूड : ताजा शाक-सब्जियाँ, फल, फलियाँ, अंकुरित दालें, मसाले और साबुत अनाज डाइटरी फाइबर में धनी होते हैं। उनके नियमित सेवन से नुकसानदेह एलडीएल कोलेस्ट्रॉल में कमी आती है। प्याज, अदरक और लहसुन : रोजाना नियम से कच्चा प्याज, अदरक और लहसुन लेना हृदय के लिए स्वास्थ्यकारी है।

फास्ट फूड और जंक फूड नहीं : पीजा, बर्गर, फ्रैंच फ्राइज, सैंडविच, आलू टिक्की, छोले-भटूरे, कचौड़ी, समोसा, मट्ठी, दालमोठ-नमकीन, देसी परांठे और ट्रिपल संडे वसा के सिद्घ भंडार हैं।  खाना पकाने वाला तेल का चयन : संतृप्त वसा (सैच्यूरेटेड फैट) और असंतृप्त वसा (अनसैच्युरेटेड फैट)। असंतृप्त वसा की भी दो किस्में हैं, मोनोअनसैच्युरेटेड फैटी ऐसिड्स और पॉली अनसैच्युरेटेड फैटी ऐसिड्स। भोजन में तीनों का समान अनुपात होना ठीक है।

सरसों, मूँगफली या जैतून (ऑलिव) जैसे मोनोअनसैच्युरेटेड फैटी ऐसिड युक्त तेलों में बनाएं, कुछ करडी, सूरजमुखी, सोयाबीन और मकई जैसे पॉलीअनसैच्युरेटेड फैटी ऐसिड तेलों में और कुछ देसी घी या मक्खन में। नारियल और ताड़ का प्रयोग कम ही करें। 

चीजें बार-बार गर्म न करें : वनस्पति तेल में बने व्यंजन बार-बार गर्म किए जाएं तो नुकसानदेह होते हैं। 

समुद्री मछलियां और सोयाबीन तेल : समुद्री मछलियों कॉड और मेकेरल में स्वास्थकर औमेगा-3 फैटी एसिड पाए गए हैं। परीक्षणों से पुष्टि हुई है कि हर हफ्ते 200-400 ग्राम कॉड और मेकेरल लेने से ट्राइग्लिसराइड के स्तर में सुधार होता है। शाकाहारियों के लिए सोयाबीन का तेल भी उतना ही उपयोगी है, चूंकि उसमें भी औमेगा-3 फैटी एसिड मिले हैं।

बस एक प्याला : 45 की उम्र के बाद सीमित मात्रा में मदिरा लेना ही स्वास्थ्यकारी है।

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