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किसी और से सवाल क्यों?

ऑस्टेलिया में भारतीय छात्रों पर हमले निंदनीय हैं। मगर इसके लिए हम भी कहीं न कहीं दोषी हैं। वे भी दोषी हैं, जो सरकार तथा बड़े-बड़े मैनेजमेंट चला रहे हैं। जब हम अपने ही देश में भारतीय छात्रों की रक्षा नहीं कर सकते तो और किसी देश से सवाल क्यों? बीते वर्ष मुंबई में राज ठाकरे की पार्टी मनसे के कार्यकर्ताओं द्वारा छात्रों पर हुए हमले के बाद किसी ने राज ठकरे का क्या बिगाड़ लिया, बल्कि वह तो राजनेता बन बैठा, क्या वो भारतीय छात्र नहीं थे? आज जिस बात को लेकर मीडिया में खबरे उठ रही हैं कि छात्रों में रोष व्याप्त। आखिर छात्र क्या करेंगे, दो चार पुतले फूंक देंगे। कहीं आगजनी करेंगे। बसें व ट्रेनें रोककर उपद्रव कर भारतीय नागरिकों को ही परेशान करेंगे न कि ऑस्ट्रेलिया को।
मनीष दुबे, पीतमपुरा, नई दिल्ली

ये कैसा महंगाई सूचकांक
टेलीविजन न्यूज व अखबारों में महंगाई दर को लगातार न्यूनतम फीसदी अंकों में प्रस्तुत किया ज रहा है जो कि अविश्वसनीय व भ्रामक है, क्योंकि आम जनता अब भी महंगाई से त्रस्त एवं सरकार को कोसती नार आती है। गरीब तबके के लोगों का जीना मुहाल है। आज भी घी, तेल, फल, मटन व सब्जियां गरीबों की पहुंच से बाहर हैं।
राजेन्द्र सिंह रावत इंदिरापुरम, गाजियाबाद

लटके तार पर अरमान
मुगलों की नगरी पुरानी दिल्ली में राष्ट्रमंडल खेलों से पहले ही खंभे पर लटकते बिजली के तारों को हटा दिया जएगा। इसके लिए बीएसईएस और सरकार के बीच सहमति होने ज रही है। इस कदम से पुरानी दिल्ली पर चार चांद लग जएंगे। बड़ा अजीब सा लगता है कि पुरानी दिल्ली में चलती-फिरती गली में मिठाई, पान, जूस, किताब और चाट पकौड़ी की दुकान और गली के बीच दजर्नों तारों को लपेटे खंभे राज। ऐसे में ऊपरी मंजिल से कूड़े से भरी थली नीचे फेंकी, तो अटक गई तारों में, लोटन कबूतर उड़े थे, रोशनदान के घोंसले के लिए और बिजली के तारों की चपेट में आ गए।
 राजेन्द्र कुमार सिंह, राहिणी, दिल्ली

राम तेरी ‘यमुना’ मैली
दिल्ली में यमुना नदी की हालत खराब है। क्या-क्या जतन नहीं किए गए। विदेशों की नकल करके सफाई के लिए टीम एवं योजना तैयार की गई, लेकिन नतीज शून्य। लगभग 25 साल पहले यमुना नदी साफ हुआ करती थी, लेकिन जसे-जसे विकास बढ़ता गया, उसका असर यमुना नदी पर पड़ता गया। दिल्ली सरकार ने अरबों रुपए सफाई पर खर्च किए, लेकिन उसकी हालत जस की तस बनी हुई है। सबको पता है कि सारा पैसा कहां गया और आगे आने वाली अन्य योजनाओं के पैसे कहां जएंगे। सरकार को इस बात पर ध्यान देने की जरूरत है कि वह ईमानदार कंपनी को ठेका दे, और खुद शासन-प्रशासन में ईमानदारी बरतने का निश्चय किया जए, तभी जकर यमुना से खुशियां बरसेंगी।
देवेन्द्र कुमार, शाहाबाद डेरी, दिल्ली

उफ ये मच्छर!
जून महीने की चुभती गर्मी में बिजली की किल्लत के कारण अब मच्छरों ने भी घरों में आतंक फैला रखा है। लोगों का जीना मुश्किल हो रहा है। बिजली और निगम अधिकारियों से मेरी अपील है कि हमारे मोहल्लों में समुचित बिजली की आपूर्ति हो और मच्छर भगाने के उपाय किये जंय। वरना मलेरिया और डेंगू जसी भयानक बीमारियों की चपेट में आने में ज्यादा वक्त नहीं लगेगा।
रूतुल, ओल्ड राजेन्द्रनगर, नई दिल्ली

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