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जमींदारों ने भूदान आन्दोलन को भी चूना लगाया, दान में मिली हजरों एकड़ जमीन का पता नहीं

चतुर जर्मीदारों ने संत विनोबा के भूदान आन्दोलन को भी चूना लगा दिया। उन्होंने जिस जमीन का दान किया उसका भोग भी कर लिया। भूदान आन्दोलन यज्ञ कमेटी के रिकार्ड में भी लगभग डेढ़ लाख एकड़ जमीन लापता है।

जमींदारों ने जमीन कागज पर तो दान कर दी लेकिन हकीकत में उस पर कब्ज नहीं छोड़ा। कागज पर हजारों एकड़ जमीन तो मिल रही है लेकिन यह है कहां न तो राज्य सरकार को पता है और न ही भूदान यज्ञ कमेटी इसके बारे में जानती है।

राज्य सरकार ने पिछले दिनों भूमि सुधार आयोग बनाया था। उसने रिपोर्ट में कहा है कि भूदान की 38 हजार 586 एकड़ जमीन पर किसका कब्ज है यह पता नहीं चल रहा है। यह जमीन सार्वजनिक एवं अन्य के नाम पर दर्ज है। भूदान यज्ञ कमेटी के आंकड़े के अनुसार भूदान में 6 लाख 48 हजार 593 एकड़ जमीन मिली और इसमें बांटने लायक जमीन केवल 2 लाख 76 हजार 28 एकड़ ही निकली।

मतलब यह कि दान देने वालों ने या तो जमीन दी ही नहीं या फिर जंगल-झड़, पहाड़, नदी और तालाब की जमीन दान कर दी। यज्ञ कमेटी के दस्तावेजों के अनुसार अकेले गोपालगंज के जमींदारों ने एक लाख 371 एकड़ जमीन दान में दी थी लेकिन इसमें से 82 हजार 172 एकड़ जमीन अयोग्य एवं अप्राप्त है।

भूदान यज्ञ कमेटी के अध्यक्ष शुभमूर्ति भी स्वीकार करते हैं कि कई जमींदारों ने संत विनोबा भावे के सामने यह स्वीकार कर लिया था कि वे अपनी जमीन दान में दे रहे हैं। यज्ञ कमेटी के रिकार्ड में उनका दान चढ़ गया लेकिन वास्तव में उन्होंने जमीन नहीं दी। संभव है कि दान के बाद भूदान आन्दोलन के कार्यकर्ता उनके पास गए ही नहीं हों और इसके कारण जमीन नहीं मिली।

भूमि सुधार आयोग की रिपोर्ट में अकेले रोहतास जिले में 11130 एकड़ जमीन 59 संस्थाओं के नाम पर दिखाई गई हैं लेकिन उपयोग कौन कर रहा है इसका पता लगाया जाना बाकी है। 

भूमि सुधार आयोग की रिपोर्ट के अनुसार सार्वजनिक एवं अन्य के खाते में गया में 6418 एकड़, औरंगाबाद में 1029 एकड़, नवादा में 478 एकड़, पूर्वी चम्पारण में 616 एकड़, गोपालगंज में 1956 एकड़, जमुई में 930 एकड़, मधुबनी में 1963 एकड़, समस्तीपुर में 819 एकड़, सुपौल में 11189 एकड़, पूर्णिया में 2285 एकड़, किशनगंज में 2670 एकड़, कटिहार में 2188 एकड़ और अररिया में 922 एकड़ जमीन है।

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  • Web Title:दान के साथ भोग भी