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कल किसने देखा

कल किसने देखा

सितारे :  जैकी भगनानी, वैशाली देसाई, अर्चना पूरन सिंह, रितेश देशमुख, श्रषि कपूर, राहुल देव, फरीदा जलाल, सतीश शाह, दिलीप ताहिल।
निर्माता एवं बैनर : वाशु भगनानी/पूजा एंटरटेनमेंट (इं) लि. और बिग पिक्चर्स
निर्देशक एवं लेखक : विवेक शर्मा
गीत :  समीर
संगीत :  साजिद-वाजिद
कहानी : पंजाब, चंडीगढ़ का रहने वाला निहाल सिंह (जैकी भगनानी) पढ़ाई के लिए मुंबई आता है तो कॉलेज में उसकी मुलाकात एक रईस रतन कपूर (सतीश शाह) की बेटी मिशा (वैशाली देसाई) से होती है। दोनों के बीच पहले तकरार होती है और फिर एक दिन दिल को छू लेने वाली एक घटना दोनों को एक-दूसरे के करीब ले आती है। इसी दौरान निहाल को इस बात का अहसास होने लगता है कि वह आने वाले कल की घटनाओं को साफ-साफ देख सकता है। इसी वजह से वह एक दिन मिशा को बम हादसे से बचा लेता है। लेकिन वह डॉन कालीचरण (रितेश देशमुख) की आंखों में आ जाता है। कालीचरण निहाल सिंह को अगवा कर बैंक लूटने का प्लान बनाता है, लेकिन पकड़ा जाता है। पुलिस कालीचरण और उसके साथियों को जेल भेज देती है। उधर, प्रो. वर्मा  को जब इस बात का पता चलता है कि निहाल आने वाला कल देख सकता है तो वह सतर्क हो जाता है, क्योंकि बम प्लांट करने वाले आतंकवादियों के गिरोह के सरगना मार्शल (राहुल देव) से वह मिला होता है। किसी तरह से प्रो. वर्मा निहाल की इस अलौकिक ताकत का फायदा उठाने में कामयाब हो जाता है और सारे शहर में बम फिट कर देता है। अब निहाल को किसी भी कीमत पर अपनी शक्ित का इस्तेमाल कर शहर को एक बड़े हादसे से बचाना है।  

निर्देशन : ‘भूतनाथ’ के बाद विवेक शर्मा की यह दूसरी फिल्म है, जिसकी कहानी भी उन्होंने खुद ही लिखी है। वाशु भगनानी के बेटे के लॉन्च पैड के रूप में यह फिल्म विवेक के हाथ से निकल गयी है। कहानी का प्लॉट अच्छा बन सकता था, लेकिन उसमें रोमांच की कमी के साथ-साथ निर्देशक की ढीली पकड़ साफ झलकती है। निर्देशक ने सिर्फ वैशाली की खूबसूरती को बेहतरीन तरीके से कैमरे में कैद करने और जैकी को ग्लैमर की ओवर डोज देने से ज्यादा मूवी में कुछ नहीं किया। निर्देशक ने गीतों को बड़े परदे पर देखने लायक तैयार किया है। लोकेशंस का इस्तेमाल अच्छा है, लेकिन दर्शकों को सिर्फ लोकेशंस नहीं मसाला भी चाहिये होता है।

अभिनय : नए कलाकारों के साथ कई जाने-माने सितारे हैं, लेकिन अभिनय किसी की अपील नहीं करता। जैकी और वैशाली दोनों को अभी काफी कुछ सीखना होगा।श्रषि कपूर के किरदार में नाटकीयता ज्यादा और भय कम है। रितेश कई जगहों पर जमे हैं, लेकिन उनका भरपूर इस्तेमाल नहीं किया गया, वरना फिल्म में कॉमेडी पक्ष को और उभारा जा सकता था। बड़े सितारों की झलकियां बचकानी लगती हैं।  
 
गीत-संगीत :  गीतों के बोल और उनकी धुनें सुनने में अच्छी लगती हैं, लेकिन कोई भी गीत याद रखने लायक नहीं है। फिल्म का टाइटल गीत ‘कल किसने देखा’ भी काफी कमजोर है। इसका फिल्मांकन भव्य है, लेकिन कोरियोग्राफी साधारण। बाकी गीत जैसे ‘आलम गुजरने को..’,  ‘आसमां झुक गया..’ और  ‘तेरे बिना लगता नहीं जिया..’ सरीखे गीतों का फिल्मांकन बेहद खूबसूरती से किया गया है। इन गीतों में वैशाली बेहद ग्लैमरस लगी हैं।
क्या है खास :  फिल्म के लोकेशंस काफी बढि़या हैं। साउथ अफ्रीका और बैंकॉक आदि स्थानों पर फिल्माए गये गीतों और दृश्यों में कमाल की सिनेमेटोग्राफी है। इन दृश्यों का कैनवास काफी बड़ा है और कलरफुल भी।

क्या है बकवास :  फिल्म में कई जगह पैचेज हैं, जो साधारण दर्शक भी आसानी से पकड़ सकते हैं।
पंचलाइन :  फिल्म के पोस्टर उत्सुकता पैदा करते हैं, लेकिन इसे किसी स्टार की लॉन्चपैड मूवी कहना ठीक न होगा।  

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  • Web Title:कल किसने देखा