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आ, गले लग जा

आ, गले लग जा

रोमांटिक तौर पर हग, झप्पी या गले मिलना पहले भी था, आज भी है। लेकिन आज लाइफस्टाइल का हिस्सा नए किस्म का हग या झप्पियां बनी हैं। चाहे लड़के हों या लड़कियां, सभी एक-दूसरे के गले मिल रहे हैं। कह सकते हैं कि गले मिलना आज अभिनंदन करने का सबसे लोकप्रिय स्टाइल है, इस हद तक कि किशोर-युवा हर घंटे या दो घंटे बाद झूम कर गले मिलते हैं, मानो अरसे बाद मिले हों। डीयू नॉर्थ कैंपस के हंसराज कॉलेज के छात्र-छात्राओं की दोस्तों की एक टोली फरमाती है, ‘हरगिज नहीं झिझकते, कूद पड़ते हैं और कस कर झप्पी मार लेते हैं। सहेली या दोस्त होने की परवाह किए बगैर।’
असल में ‘कौन बनेगा करोड़पति’ में बिग बी ने हॉट सीट पर बैठने वाले हर प्रतियोगी से गले मिलने का ऐसा चलन शुरू किया कि हग या झप्पी ने घर-घर में पैठ कर ली।  फिर क्या? हर फिल्म अवॉर्ड समारोह में सितारे स्टेज पर हाथ मिलाने की बजाए गले मिलने लगे। इसी बीच, मुन्नाभाई की ‘जादू की झप्पी’ ने हर छोटे-बड़े को अपना दीवाना बना दिया। आज क्या स्कूल, क्या कॉलेज, क्या पारिवारिक समारोह हर कोई गले लगने-लगाने को आतुर है। किशोर और युवा तो झप्पी को रोजमर्रा की जिंदगी में खासी तवज्जो दे रहे हैं।

झप्पी की हद
हग या कहें झप्पियां हैं तरह-तरह की। एक है यार-दोस्तों में सादी झप्पी। यही सबसे लोकप्रिय और मामूली है। लेकिन जब दोस्त और सहेली गले लगते हैं तो बात कुछ-कुछ बदलने लगती है। दूसरा हग या झप्पी है- एक यार दूसरे को यक-ब-यक घूंसा मारता है, फिर पीठ थपथपाता है और गले लगा लेता है। एक और है- पीछे से झप्पी मारना। एकदम से पीछे से आना और बांहों में लपेट लेना। और तो और, सबसे नए किस्म की झप्पी है तिगड़ी की। तीन सहेलियां या तीन दोस्त एक साथ आलिंगन करते हैं। अक्सर खेल के मैदान में, जोश-उमंग के बीच कई-कई खिलाडम्ी एक साथ एक-दूसरे को गले लगा लेते हैं।

झप्पी तो झप्पी, लोगों में एक-दूसरे को छूने की आदतों में भी फर्क देखा गया है। देश-देश के लाइफस्टाइल पर निर्भर करता है कि कोई किसी को बातें करते-करते कितनी ज्यादा या कम बार छूता है। डॉ. केन कपूर ने अपनी किताब ‘बॉडी बिजनेस’ में लोगों के हर घंटे छूने की रफ्तार पर अध्ययन किया है। इससे जाहिर होता है कि पोर्ट रिको और पेरिस में हर घंटे छूने की तादाद क्रमश: 180 और 110 बार रही, जबकि फ्लोरिडा में महज 2 और लंदन में 0 है। दक्षिण यूरोपीय, अरब, रूस और एशियाई देशों में टच या छूने और गले लगने-लगाने को खासी अहमियत दी जाती है। बात-बेबात पर सभी एक-दूसरे को झप्पी मारते ही हैं, चाहे वे पुरुष हों या महिलाएं।

उधर, हैंड शेक या कहें हाथ मिलाने के जमाने के पेरेंट्स बात-बात पर गले मिलने या लगाने के माहौल से शायद नाखुश हैं। तेरह और सोलह साल के दो बेटों की मां रजना साहनी कहती हैं, ‘शब्दों के बगैर टच का चलन फैल रहा है। शब्द कम हैं और बॉडी ज्यादा बातें करती है। हाय भी है, मुस्कान भी है, हाथ हिलाना या मिलाना भी है, पर झप्पी की बहार भी है। स्कूल-कॉलेजों का यह माहौल देखकर तो लगता है कि मैं इस देश में टूरिस्ट हूं और यहां के रस्मो-रिवाजों से अनजान हूं।’

हिट और फिट
झप्पी आज हिट है, क्योंकि फिट रखने में अहम रोल निभाती है। तनाव भगाने के लिए ‘जादू की झप्पी’ कमाल दिखाती है। इस जैसा और कोई नहीं है। मनोवैज्ञानिक गले मिलने में कोई हर्ज नहीं देखते। उनके अनुसार, बीते सालों के दौरान जिंदगियों में गहरा खालीपन उभरा है। बिना शर्त प्यार की झप्पी देने वाला कोई नहीं रहा। एक झप्पी बखूबी जताती है कि सामने वाले की जिंदगी में आपके लिए इस कदर अहम जगह है। इसलिए रोजाना सुबह जादू की झप्पी से दिन की शुभ शुरुआत करना बेहतरीन अनुभव है। गले मिलने का मतलब छूना, टच करना या स्पर्श है।

झप्पी एक तरह की बॉडी लैंग्वेज ही है। अगर कोई दोस्त आपको दिल से पसंद करे तो उसकी झप्पी में कुछ हिचक नजर आ सकती है। इस बारे में अर्चना कोहली बताती है, ‘मैं को-एजुकेशन स्कूल में पढती हूं। इसलिए जानती हूं कि दोस्त खुल कर गले मिलते हैं, रत्ती भर भी नहीं झिझकते। जबकि अगर दोस्त झिझके तो समझो मामला सीरियस है।’ हालांकि अभी भी कुछ इससे इत्तेफाक नहीं रखते। सविता बजाज कहती हैं, ‘हैलो-हाय या हाथ मिलाना ही काफी है। गले मिलने की जरूरत ही क्या है।’

खैर, सच यही है कि झप्पी सबकी पसंद बन चुकी है, इसलिए अफसोस मत कीजिए कि आपको फलां अवॉर्ड नहीं मिला या आप अमुक मोबाइल नहीं खरीद पाए, क्योंकि छोटी खुशियां भी जिंदगी को हराभरा बना देती हैं और झप्पी से ऐसी खुशियां लोगों को आसानी से मिल जाती हैं। अपने जिगरी यार से गले लगने में बेइंतहा खुशी होती है। ऐसी छोटी-छोटी खुशियों भरे पल लंबे अर्से तक साथ चलते हैं। किसी मां से पूछिए कि उसके लिए खुशी क्या है? वह झट से शायद यही कहेगी, ‘अपने लाडले या लाडली से गले मिलना।’मुन्ना भाई की ‘जादू की झप्पी’ सचमुच जादुई है। लॉस एंजिल्स में तो झप्पियों की क्लासें लगती हैं। जादू की झप्पी ने हिन्दुस्तानियों के दिलों को बराबर छुआ है। गले मिलना चाहत का इजहार है। इससे चेहरे पर मधुर मुस्कान उभरती है। लगता है कि आपको कोई इतना ज्यादा पसंद करता है। वाकई यही है पावर ऑफ टच!

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