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दो टूक

दिल्ली में सोमवार का दिन लुटेरों का दिन था। कहीं बाइक सवार पिस्तौलधारियों ने रंग दिखाए तो कहीं घर वालों को बंधक बनाकर डकैती डाली गई। गौर से देखिए। ये घटनाएं लुटेरों की सफलता की कहानियां नहीं हैं। ये पुलिस की असफलता की कहानियां हैं।

कानून को ठेंगा दिखाने वालों के ‘बुलंद हौसलों’ और ‘पक्के इरादों’ की कहानियां हैं। भजनपुरा के पेट्रोल पंप पर तैनात जो सुरक्षा गार्ड लुटेरों की गोली से शहीद हुआ, वह करगिल युद्ध में हिस्सा ले चुका था। दुश्मन की गोलियां उसे नहीं मार पाईं। पर अपनों की गोलियों ने छलनी कर दिया।

दूसरी ट्रेजडी गुड़गांव में घटी। वहां एक महिला ने पुलिस की मौजूदगी में कथित तौर पर खुद को चाकू मार लिया। पुलिस इस ‘लाइव खुदकशी’ को बेबस देखती रही। ये सब हमारी पुलिस की ‘कार्यकुशलता’ के अक्स हैं। कोई चाहे तो इन पर रिसर्च कर सकता है।

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