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पार्षदों के फंड में किसी तरह की कोई कटौती नहीं होगी

पार्षदों के दो करोड़ रूपये के फंड में किसी तरह की कोई कटौती नहीं होगी और दो-दो करोड़ रूपये का फंड मिलता रहेगा। पार्षद अपनी योजनाएं बनाएं और एस्टीमेट बुक कराएं। इसके साथ ही 50 लाख रूपये तक के काम मैन्युअली मंजूर किए जा सकेंगे।


यह आश्वासन मेयर डा.कंवर सेन ने सोमवार को सदन में बजट प्रावधानों पर पार्षदों द्वारा उठाए गए सवालों पर दिया। उन्होंने कहा कि यह अधिकार निगम का है कि वह कैसे खर्च करती है। कोई और एजेंसी पर इस पर रोक नहीं लगा सकती। पार्षदों ने सबसे पहले अपने मोबाईल फोन की राशि कम किए जाने का मामला उठाया। सदन के नेता सुभाष आर्य ने कहा कि जब सदन पार्षदों के  मोबाईल फोन के लिए डेढ़ हजार रूपये की राशि को मंजूरी दे चुका है तो इसे घटाकर एक हजार रूपये कैसे किया गया। यह फैसला सदन की सहमति के बिना नहीं बदल सकता। इसी तरह लैपटाप आपरेटर की राशि का मामला भी दिल्ली सरकार ने मंदी की आड़ में रोक दिया है। विधवा की लड़की की शादी के लिए दी जाने वाले रकम भी नहीं मिल पा रही है।


विपक्ष के नेता जयकिशन शर्मा ने कहा कि जब सदन किसी प्रस्ताव को पारित कर देता है और उसे फिर लागू न किया जाए तो यह सदन की गरिमा का सवाल है। उन्होंने बढ़ी पेंशनर्स की संख्या व बढ़ाई एक हजार रूपये की राशि पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस पर अभी तक अमल नहीं हो पाया है। लैपटाप आपरेटर के लिए पांच हजार रूपये देने की घोषणा भी हवा में है। पूर्व स्थायी समिति अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि  कभी उपराज्यपाल तो कभी दिल्ली सरकार की आड़ में गैर योजना मद की राशि को रोकना गैर-संवैधानिक है।

अगर वित्तीय संसाधनों को जुटाने में निगमायुक्त अड़चन महसूस कर रहे हैं तो उसे स्थायी समिति के समक्ष बताएं। पेंशन राशि बजट प्रावधानों का हिस्सा है। निगमायुक्त के.एस.मेहरा ने कहा कि मोबाईल बिल राशि कम करने की जानकारी उन्हें नहीं है।  अब हर वार्ड में जेई भी तैनात कर दिया गया है तथा पेंशन राशि की फाइल भी प्रोसेस में हैं।

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