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नगर निगम का खजना खाली

नगर निगम का खजना खाली हो गया। कर्मचारियों की तनख्वाह या फिर दफ्तर के जरूरी कामकाज निपटाने के लिए ही कुछ धन बचा है। पैसा न होने से निगम के फाइनेंस कंट्रोलर के पास नए विकास कार्यो की फाइलों का ढेर लगा हुआ है। ठेकेदारों की पेमेंट रोकने व नए विकास कार्यो की फाइलों पर फिलहाल लगाई रोक से निगम की कंगाली की आशंका प्रबल हो रही है। निगमायुक्त सीआर राणा का कहना है कि पुराने काम पूरे होने के बाद ही नए विकास कार्यो की फाइलें पास की जाएंगी।


पैसा न होने से जवाहर लाल नेहरू अर्बन रिन्यूवल मिशन के प्रोजेक्टस की गति थम गई। जिनको चलाने के लिए निगम ने एनसीआर प्लानिंग बोर्ड से हाल में 23 करोड़ रुपये का कर्ज लिया है। ताकि शेयर देकर केंद्र सरकार से मंजूर राशि ली जा सके। साप्ताहिक बैठक में भी सोमवार को निगमायुक्त ने रिकवरी तेज करने के लिए अफसरों को सख्त हिदायत दी। ताकि कुछ पैसा एकत्रित करके निगम का खर्चा चलाया जा सके। निगमायुक्त ने माना कि आमदनी कम होने से कई बार दिक्कत सामने आती हैं। मगर उनको दूर कर लिया जाएगा। विकास कार्यो की नई फाइल पास करने की बाबत उन्होंने स्पष्ट मना कर दिया। तर्क है कि शहर में पहले ही काफी कार्य चल रहे हैं। उनको पूरा होने के बाद नए कार्य छेड़े जाएंगे। ताकि निर्धारित समय में कार्य हो सकें। नए वित्तवर्ष के सवा छह सौ करोड़ के बजट का 25 फीसदी हिस्सा सरकार ने मंजूर कर दिया है।

उधर, ठेकेदार पेमेंट को लेकर विरोध कर रहे हैं। अफसरों के टेबल का सफर तय करने के बाद नए विकास कार्यों की फाइल फाइनेंस कंट्रोलर की टेबल पर जाकर दम तोड़ रही हैं। उनको आगे नहीं बढ़ाया जा रहा है। खजना खाली होना इसकी वजह बताई जा रही है। नए आमदनी स्त्रोत बढ़ाने की बाबत निगमायुक्त ने इस पर विचार करने की बात कही।

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