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संयुक्त शिक्षा निदेशक ने माना स्कूलों की धांधली को

अपने ही नियमों की धज्जियां उड़ते देखने के बाद भी अथॉरिटी के आला अफसर, सीबीएसई और उत्तर प्रदेश शासन निजी स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई के स्थान पर शांत बैठे हुए हैं। अथॉरिटी की लीज डीड, सीबीएसई की गाइड लाइंस और शासन की एनओसी की किसी भी शर्त का निजी स्कूल पालन नहीं कर रहे हैं। खुद के नियमों की अवहेलना होते देख रहे अधिकारी स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई के लिए उच्च स्तरीय कमेटी की रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं।


विश्व भारती स्कूल को चार मई को भेजे गए अथॉरिटी के कारण बताओ नोटिस में लीज डीड की शर्तो की ओर स्कूल का ध्यान आकर्षित करते हुए लिखा है कि सीईओ की अनुमति के बाद ही स्कूल के फीस स्ट्रक्टर में बदलाव किया जा सकता है। इसके बावजूद स्कूल ने बगैर सीईओ की अनुमति के फीस बढ़ा दी। प्रतिमाह 60 रुपए ट्यूशन फीस और 30 रुपए अन्य चार्जेस से ज्यादा नहीं लेने के अथॉरिटी की शर्त का पालन भी स्कूल नहीं कर रहा है।
सीबीएसई की फीस गाइड लाइंस की अनुसार स्कूल उतनी ही फीस बच्चों से वसूल सकता है, जितनी अनुमति शिक्षा विभाग के प्रमुख की ओर से निर्धारित की गई है। गाइन लाइन यह भी कहता है कि कैपिटेशन फीस और किसी अन्य प्रकार का डोनेशन दाखिले के समय स्कूल नहीं लेगा।

यहां पर भी निजी स्कूल अपनी मनमानी कर रहे हैं। शिक्षा विभाग के संयुक्त निदेशक वी.के.सक्सेना ने गाजियाबाद, मेरठ, बुलंदशहर और गौतमबुद्धनगर के सीबीएसई और आईसीएसई बोर्ड से सम्बद्ध स्कूलों को जारी किए गए नोटिस में कहा है कि उत्तर प्रदेश शासन से एनओसी प्राप्त कर निजी स्कूल छठे वेतनमान की सिफारिशों को लागू करने की आड़ में मनमानी कर रहे हैं। स्कूलों का संचालन समाजसेवा के रूप में नहीं बल्कि आर्थिक लाभ के लिए किया जा रहा है। स्कूल मानमानी से बाज आएं। नहीं तो कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद भी कार्रवाई की नहीं गई।

स्कूलों की मनमानी और अभिभावकों के आंदोलन से विभाग की छवि धूमिल हो रही है। स्कूल प्रत्येक कक्षा में दस फीसदी स्थानों पर अनुसूचित जाति व जनजाति के छात्रों को प्रवेश नहीं दे रहे हैं। स्कूल एनओसी में अंकित प्रतिबंध संख्या तीन और सात का उल्लंघन कर रहे हैं। ’

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