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टीटीएम महात्म्य

अंग्रेजी के कुनबे में ‘जय हो’, ‘स्लमडॉग’ और ‘चड्ढी’ अपनी चड्ढी नहीं गांठ पाए। कोई गल नहीं। अपनी हिंग्लिश की डिक्शनरी जिंदाबाद। मैं इस बात को लेकर परम प्रसन्न हूं कि मेरे पर्सनल शब्दकोश में इधर एक नए वर्ड का इजाफा हो गया है। वह है- टीटीएम। टीटीएम बोले तो ‘ताबड़तोड़ तेल मालिश’।

यह टीटीएम सुनने में एटीएम का सहोदर लगता है। और लगे भी क्यों न! दोनों ठहरे धन प्रदायक। हालांकि एटीएम से फकत सौ-पांच सौ के नोट निकलते हैं, पर जो अपने यहां टीटीएम मशीन लगा लेता है, उससे सीधे गड्डियां-दर-गड्डियां बरसती हैं।

टीटीएम मशीन जब देने पर आती है, नोट गिनते नहीं बनते। पिछले दिनों संसद में माननीय लालू प्रसाद जी ने टीटीएम की महत्ता पर अपना दिव्य प्रवचन किया। सोनिया समेत समस्त श्रोताओं को बोल वचन का पुण्य लाभ नसीब हुआ। लालू जी के इस प्रवचन को भाषा पर किए गए उनके पूर्व के उपकारों की एक कड़ी के रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए। टीटीएम को दस लाख एकवां शब्द बनाने की मुहिम भी आरंभ की जानी चाहिए।

वैसे जमाना विशुद्ध टीटीएमबाजों का है। प्रतिभा गई तेल लेने। अब बिना तेल लगाए कुछ नहीं मिलता। इस टीटीएमगिरी की आवश्यकता उनको भी पड़ती है, जो बाबूगिरी करते हैं। उनको तो और भी जो नेतागिरी करते हैं। चमचे घिस गए। मक्खन महंगा है। ऐसे में टीटीएम का टोटका मुफीद है। इंसानी भगवानों के तेल मालिश करो तो करोड़ों का फायदा। आसमानी भगवानों के करो तो लाख लाभ।

पर इस ताबड़-तोड़ तेल मालिश में तनिक सावधानी जरूरी है। मेरे उस कारोबारी मित्र की तरह। जो शनि की मूर्ति को प्रत्येक शनिवार तेल से नहलाते रहे। पर नतीजा उल्टा आने लग गया था। धंधा मंदा चलने लगा। जिस कंपनी का शेयर खरीदते, वही राम नाम सत्यम् हो जाती। पूजा का विपरीत परिणाम आ रहा था। जब एक मिल पर छापा पड़ा, तो पता लगा कि जिस खास ब्रांड का तेल वे शनि महाराज को लगा रहे थे, सुसरा तेल ही मिलावटी था।

इसलिए ताबड़-तोड़ तेल मालिश सदैव शुद्घ मन और शुद्घ माल से करने का महात्म्य है। पक्का चंपू वह होता है, जो हर वक्त अपने मुंह में खुशामद का तेल रखता है। जिससे काम पड़े, उसको लगा देता है। अगला आदमी कितना भी कड़क मिजाज हो, सूखे में रपट जाता है।  आपने वह वाला फिल्मी गाना तो सुना ही होगा- ‘सिर जो तेरा चकराए, या दिल डूबा जाए। आ जा प्यारे, पास हमारे, काहे घबराए?’ सो प्यारो, इस टीटीएम से घबराना नहीं। युग-युग से चंपी से बहुतेरे काम बनते आए हैं। सो आप भी चंपू बन जाओ। फायदा न हो तो तेल के पैसे वापस।

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