class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

हार की खीझ

कहा जाता है कि जीत बहुत कुछ सिखा देती है, लेकिन भविष्य उसी का होता है जो हार से सबक लेना सीख जाता है। भारतीय जनता पार्टी की दिक्कत दोहरी है। जीत वाला अध्याय तो फिलहाल उसके लिए नहीं है और हार से सबक लेने की योग्यता वह दिखा नहीं पा रही है।

आमतौर पर हारने वाला राजनैतिक दल कुछ दिन तक हार के कारण तलाशने, हालात का विश्लेषण करने वगैरह का स्वांग करता है और फिर नए मुद्दे तलाश कर अगले चुनाव की राजनीति में जुट जता है। पार्टियां अपनी हार और जीत से सचमुच कितना सीखती हैं, इसके बारे में प्रामाणिक ढंग से कुछ नहीं कहा जा सकता। पर एक अच्छे नेतृत्व से यह उम्मीद जरूर की जती है कि वह हार का गम भुलाकर नई उम्मीदों को संजोते और बंधाते हुए पार्टी को एकजुट करे।

भारतीय जनता पार्टी की दिक्कत ठीक यहीं पर है। जिस नेतृत्व से हम उम्मीद करते हैं, वह पस्त है और अलविदा की मुद्रा में आ गया है और पार्टी पर कब्जे की जंग शुरू हो गई है। भाजपा की दिक्कत यह है कि उसकी दूसरी पांत में ढेर सारे मझोले कद के अतिमहत्वाकांक्षी नेताओं के अलावा दो तरह की वचारिक धाराएं हैं, जो उसे अलग-अलग दिशाओं में खींचती हैं।

एक तरफ संघ की हिंदूपरक विचारधारा है तो दूसरी तरफ वे हैं जो भाजपा को कांग्रेस जसे मध्यमार्गी विकल्प के तौर पर देखते हैं। हार की इस बेला में महत्वाकांक्षाओं और विचारधाराओं पर लगे अनुशासन के ढक्कन खुल गए हैं और फिलहाल एक दूसरे को झुलसाने वाली राजनीति का लावा ही दिख रहा है। इस बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भी पार्टी पर अपनी दावेदारी का मोर्चा खोल रहा है।

मुमकिन है कि अगले कुछ रोज में पार्टी के इस झगड़े का कुछ समाधान निकल आए। या ये भी हो सकता है कि वह इन अतंर्विरोधों पर अनुशासन की कोई नई खाल ओढ़कर युद्धविराम की मुद्रा अख्तियार कर ले। या यह भी हो सकता है कि कोई एक धड़ा दूसरे से बीस साबित हो जए, और दूसरे को चुप्पी साध लेने में ही भलाई नजर आए।

लेकिन नतीज सिर्फ एक होगा- राजनैतिक तौर पर उस पार्टी का कमजोर हो जना, जो देश का सबसे बड़ा विपक्षी दल है। भाजपा की फूट कांग्रेस के लिए एक अच्छी खबर हो सकती है, लेकिन देश के लिए यह ज्यादा अच्छी खबर नहीं है। लोकतंत्र में किसी देश को जितनी जरूरत मजबूत सत्ताधारी दल की होती है, उतनी ही मजबूत विपक्ष की।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:हार की खीझ