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टेस्ट क्रिकेट के बिना जिंदा नहीं रह सकता: तेंदुलकर

टेस्ट क्रिकेट के बिना जिंदा नहीं रह सकता: तेंदुलकर

टवेंटी20 क्रिकेट की तुलना उस मिठाई से करते हुए जो किसी की भूख नहीं मिटा सकती, चैम्पियन बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर ने कहा है कि टेस्ट क्रिकेट ही असल खाना है और वह इसके बिना जिंदा नहीं रह सकते। तेंदुलकर ने द टाइम्स से कहा, टवेंटी20 मिठाई की तरह है। यह स्वाद में अच्छा है लेकिन इससे पेट नहीं भरता। उसके लिये पूरा खाना जरूरी है जो टेस्ट क्रिकेट है। मैं उसके बिना जिंदा नहीं रह सकता।

उन्होंने कहा कि टेस्ट क्रिकेट किसी भी खिलाड़ी के लिये हमेशा नंबर वन प्रारूप रहेगा। उन्होंने कहा कि एक क्रिकेटर के लिये टेस्ट क्रिकेट नंबर वन रहेगा। टेस्ट क्रिकेट में गेंदबाज हमेशा आपको आउट करने की जुगत में रहता है और आपको पूरे पांच दिन अच्छा खेलना होता है। तेंदुलकर ने कहा कि टवेंटी20 में ऐसे खिलाड़ी 20-30 मिनट में कमाल कर जाते हैं जिनके बारे में आपने कभी सुना भी ना हो। इसमें कामयाब होना आसान है।

टेस्ट क्रिकेट में 54.58 की औसत से 12,733 रन बनाने वाले तेंदुलकर के लिए हालांकि एकदिवसीय विश्व कप जीतना अब भी सपना बना हुआ है और वह पांच प्रयासों में भी सफलता हासिल नहीं कर पाये हैं। तेंदुलकर ने 1983 के विश्व कप में भारत की जीत पर कहा, मैंने अपने दोस्त के घर फाइनल मैच देखा था। मेरे दोस्त जो मुझसे काफी बड़े थे, जश्‍न मना रहे थे, उछल रहे थे। मैं भी उनके साथ जश्‍न मनाने लगा लेकिन मुझे नहीं पता था कि क्या हो रहा है।

उन्होंने कहा, इसके बाद ही मैंने क्रिकेट को गंभीरता से लेना शुरू किया। इससे पहले मैं टेनिस गेंद के साथ इसका मजा लेता था। उस जश्‍न के माहौल के दौरान मैंने देखा कि क्रिकेट पूरे देश का मूड बदल सकता है। यही कारण है कि विश्व कप जीतना मेरा सपना है।

तेंदुलकर का नौ वर्षीय बेटा अर्जुन हालांकि फटाफट क्रिकेट को लेकर अधिक उत्साहित है। इंडियन प्रीमियर लीग में मुंबई इंडियन्स की कमान संभालने वाले तेंदुलकर ने स्वीकार किया, मेरे बेटे को क्रिकेट पसंद है लेकिन टवेंटी20 ने इसे और बढ़ा दिया है। यह संगीत या पोशाक नहीं बल्कि इसमें पड़ने वाले छक्कों की संख्या है। वह मैदान पर उतरकर ताबड़तोड़ खेलना चाहता है। यही उसे रोमांचित करता है।

तेंदुलकर ने कहा कि वह अधिक संख्या में लोगों का ध्यान खींचने की टवेंटी20 क्रिकेट की क्षमता का इस्तेमाल खेल के वैश्वीकरण के लिए करना चाहेंगे। उन्होंने कहा, मैं इसे नये देशों तक ले जाना चाहता हूं, खासकर अमेरिका में। यह कल ही नहीं हो सकता लेकिन प्रयास किया जा सकता है।

तेंदुलकर ने कहा, लेकिन इसने (टवेंटी20) दुनिया में लोगों पर प्रभाव छोड़ा है, यहां तक कि क्रिकेट नहीं खेलने वाले देशों में भी, इस प्रारूप ने दोबारा दिलचस्पी जगा दी है। पूर्व भारतीय कप्तान ने यह भी कहा कि वह चाहते हैं कि खेल की वैश्विक लोकप्रियता का फायदा टेस्ट प्रारूप को भी मिले और नयी पीढ़ी इसे नयी दिलचस्पी के साथ स्वीकार करे।

उन्होंने कहा, किसी ने कहा था कि क्रिकेट की पहली सनसनी स्टेडियम के अंदर जाना है और यह जीवनभर आपको याद रहता है। निश्चित तौर पर मेरे साथ भी ऐसा ही हुआ। मुझे याद है जब मैं 10 वर्ष की उम्र में वानखेड़े स्टेडियम में गया था, उस समय वेस्टइंडीज की टीम खेल रही थी।

उन्होंने कहा, यह बेहतरीन था। मैं सोच भी नहीं सकता था कि मैदान कैसा होगा, लोगों से खचाखच भरा और चारों ओर शोरगुल। मैं सोच भी नहीं सकता था कि गेंद कितनी तेजी से जा रही है। मेरे हीरो (सुनील) गावस्कर और विवियन रिचडर्स भी वहां थे। यह देखना विशेष था। टीवी पर आपको ऐसा अहसास नहीं होता। वेस्टइंडीज के कप्तान क्रिस गेल के बयान कि टेस्ट क्रिकेट के खत्म होने पर उन्हें अधिक दुख नहीं होगा, तेंदुलकर ने कहा कि गेल का अपना नजरिया हो सकता है लेकिन वह अच्छा इंसान है।

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