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दो टूक

दिल्ली में एक मजदूर की मौत इस कारण हो गई कि उसे इलाज के लिए एक से दूसरे अस्पताल के लिए रेफर किया जाता रहा। उधर, गाजियाबाद में एक किसान की पुलिस हिरासत में मौत हो गई। उस बेचारे को मारपीट के मामले में पकड़ा गया था लेकिन पुलिस वालों की जेब गर्म नहीं कर पाया इसलिए उसकी पुलिसिया पिटाई हो गई।

यह है प्रशासन का निरंकुश और अमानवीय रवैया। प्रशासन में भी आम आदमी के बीच से गए लोग ही होते हैं लेकिन डॉक्टर-पुलिस अधिकारी होते ही वे विशिष्ट हो जाते हैं। फिर उन्हें जनसेवक की परिभाषा और उसके कर्तव्यों की याद नहीं रहती। वे आम आदमी से ऐसा सलूक करने लगते हैं जैसे वे किसी दूसरे समाज के हों।

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