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गरीबों को पकड़ रही हैं सरकारी एजेंसियां

गरीबों को पकड़ रही हैं सरकारी एजेंसियां

सोनौली के इंडो-नेपाल बॉर्डर पर एक साइकिल सवार दम्पति एसएसबी वालों की निगाह बचाकर बड़े वाहनों की आड़ में चुपके से नेपाली सीमा में दाखिल होना चाह रहा है तभी एक जवान साइकिल पीछे से खींचकर उन्हें गिरा देता है। औरत अपनी साड़ी के भीतर एक बड़ा सा झोला छिपाए है जिसमें चीनी है। नेपाल में चीनी छह रुपए किलो अधिक महँगी है। जवान दम्पति को खींचकर भारतीय सीमा में ले जाकर उस झुंड में बिठा देता है जहाँ पहले से ही उस जैसी दजर्नों औरतें व मर्द भरे हुए झोल लिए बैठे हैं।


 यह नजरा पाठकों के सामने इसलिए क्योंकि सोनौली, बढ़नी या रुपइयाडीह जैसे बॉर्डर देश की आंतरिक सुरक्षा के नजरिए से बेहद संवेदनशील हैं। इसके बावजूद इंडो-नेपाल बॉर्डर पर तैनात एसएसबी, पुलिस, आव्रजन, व्यापारकर और कस्टम जैसे महकमों के निशाने पर आईएसआई, आतंकी, बड़े तस्कर या अपराधी गिरोह नहीं बल्कि दोनों देशों के सीमावर्ती इलाकों में रहने वाला गरीब तबका है। इनके साथ अक्सर सुरक्षा बलों का टकराव होता रहता है। सौ-दो सौ रुपए रोज कमाने के लिए यह औरतें और मर्द भी दोनों मुल्कों के बीच कैरियर का काम करते हैं। इन्हें नेपाली दुकानदार प्रति किलो एक रूपया देते हैं। दूसरी तरफ यहाँ सभी को सबको मालूम है कि इस बॉर्डर से ट्रकों के जरिए भारी मात्रा में भारत की सब्सिडी वाली खाद, चीनी, चावल और चोरी की गाड़ियाँ रोजना में नेपाल पहुँच जाती हैं।

उधर से आईएसआई एजेंट, नकली विदेशी मुद्रा, अवध हथियार और नशीले पदार्थ लगातार आते हैं। यूपी के सीनियर पुलिस अधिकारी इस बात को मानते हैं। एसएसबी के एक स्थानीय अधिकारी से इस संवाददाता ने पूछा-कभी कोई आतंकवादी, हथियारों का जखीरा या नकली नोट पकड़े तो वह बगलें झांकने लगे। एक खुफिया एजेन्सी के अधिकारी बताते हैं-खुले बॉर्डर की आड़ लेकर यहाँ सरकारी एजेन्सियाँ घूसखोरी का खुला खेल रही हैं। पुलिस, कस्टम और इम्रीग्रेशन के लोग यहाँ अपनी तैनाती की मनौती मानते हैं। इस सीमा को मोटी कमाई वाली पोस्ट माना जाता है। कई ऐसी भारतीय चीजें हैं जो नेपाल वालों के लिए बड़ी सौगात की तरह हैं। मसलन सूती कपड़े या पारले बिस्किट। सूती कपड़ों पर नेपाल में अस्सी रुपए प्रति मीटर तक का अतिरिक्त टैक्स लगता है। भारतीय वाहनों पर ढाई सौ प्रतिशत का अतिरिक्त कर लगता है। नेपाल में भरहवा के एक कारोबारी ने बताया कि छह साल पुरानी मारुति कार उन्होंने साढ़े पाँच लाख नेपाली यानी करीब पौने चार लाख रुपए में खरीदी है। हीरो हाण्डा स्पलेंडर यहाँ सत्तर हजार रुपए भारतीय मुद्रा में मिलती है। इसीलिए यहाँ चोरी की भारतीय गाड़ियों का बाजार काफी समृद्ध है। यह सारा कारोबार सीमा पर तैनात सरकारी लोगों की मिलीभगत से ही हो रहा है।
             
इंट्रीगेट्रेड चेकपोस्ट की जरूरत
यूपी में इंडो-नेपाल बॉर्डर की बढ़नी, सोनौली और रुपइयाडीह जसी सभी सीमाओं पर इंट्रीग्रेटेड चेकपोस्ट की जरूरत है। फिलवक्त भारतीय एजेन्सियों के बीच ही लड़ाई की स्थिति है। सोनौली में तैनात कस्टम अधिकारी अरशद महमूद व उनकी टीम के अन्य सदस्य कहते हैं- कस्टम जिस माल को ओके कर देता है, उसे भी एसएसबी व पुलिस वाले जांचते हैं। इससे बेवजह का जाम लगता है। उनका कहना है कि बॉर्डर पर हर ट्रक की पूरी छानबीन असंभव है। तस्करी को पकड़ना है तो इंटेलिजेंस को बेहतर बनाना होगा। उन्होंने कहा कि भारत-नेपाल सीमा पर इंट्रीगेटेड चेकपोस्ट की जरूरत है जिससे यहाँ का आवागमन सुचारु और सुरक्षित हो सके।

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