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कंप्यूटर के 10 अवतार

आज की ऑनलाइन कंप्यूटरी दुनिया शुरुआत से ऐसी नहीं थी। हमारे जीवन का अहम हिस्सा बनने से पूर्व शुरुआती कंप्यूटरों को जनता में लोकप्रिय करने के लिए वैज्ञानिकों को काफी मशक्कत करनी पड़ी थी। उन्हें यह बार-बार बताना पड़ा था कि कंप्यूटर क्या है और वह क्या कर सकता है। यहां हम दे रहे हैं शुरुआत से आज तक के कंप्यूटरों के चरणबद्ध विकास की जानकारी।

डिफरेंस इंजन
चाल्र्स बबेज को ब्रिटिश सरकार से पैसा इसलिए नहीं मिल सका, क्योंकि वह ऐसी मशीन नहीं बना सके थे, जो गणितीय गणनाएं करती। इसलिए इंग्लैंड में कंप्यूटर क्रांति की शुरुआत 1822 में नहीं हो सकी थी। बबेज ने एक ऐसा कंप्यूटर बनाया था, जिसका प्रारूप हाल में ही तैयार हो सका है और वह उन्हीं के डिजइनों पर आधारित है।

इनियाक
यह कंप्यूटर प्रति सेकेंड 357 एप्लीकेशन के प्रोग्राम कर सकने में सक्षम था। 1946 में इसके आविष्कार के बाद लोगों को यह अंदाज लग पाया कि कंप्यूटर क्या कर सकने में सक्षम है। हालांकि इस कंप्यूटर का वजन तीस टन था, और इसमें 17,478 वक्यूम टच्यूब लगी हुई थीं और यह 150 किलोवाट ऊज्र की खपत करता था। इसमें प्रोग्रामिंग करने के लिए पैच केबल्स और स्विच की आवश्यकता
होती थी।

आईबीएम 360
इस कंप्यूटर की प्रसिद्धि ने ही आधुनिक कंप्यूटर जगत को आíथक आधार दिया था। 7 अप्रैल, 1964 में आईबीएम ने इस कंप्यूटर के आविष्कार की घोषणा की थी। इस में कई कलपुज्रे लगे थे और इसके समांतर मॉडल्स का मूल्य भिन्न था। इस कंप्यूटर का डिजइन कंप्यूटर के इतिहास में सबसे ज्यादा मशहूर माना जाता है।

डाटा प्वाइंट 2200
डाटा प्वाइंट 2200 की घोषणा 1970 में कंप्यूटर टíमनल कॉपरेरेशन ने की थी। इस कंप्यूटर को जल्दी गर्म होने से बचाने के लिए मशीन प्रोसेसर को एक सिंगल चिप से बदल दिया गया था। इस कंप्यूटर में मोडेम लगा सकने की सुविधा थी, साथ ही इसमें डाटा स्टोरेज के लिए हार्ड ड्राइव भी लगा दी
गई थी।

जिरॉक्स पार्क आल्टो
इस कंप्यूटर में कर्सर को नियंत्रित करने के लिए माउस लगा हुआ था, इस कंप्यूटर में आप विंडो और आइकन्स देख सकते थे। साथ ही इसमें ईथरनेट की सुविधा भी उपलब्ध थी। इतने सारे फीचर्स पहली बार किसी कंप्यूटर में एक साथ आए थे। इस मशीन का निर्माण जेरॉक्स पालो ऑल्टो रिसर्च सेंटर ने 1974 में किया था। लेकिन दुर्भाग्य की बात ये थी कि जेरॉक्स उस दौरान इस कंप्यूटर की लोगों में पहचान बनाने में नाकामयाब रहा था।

टीआरएस-80
यह कंप्यूटर 1977 में आया था। इस कंप्यूटर में क्यूडब्लयूईआरटीवाई की-बोर्ड था। इनका आकार छोटा था और यह बेसिक प्रोग्रामिंग लंग्वेज कर सकने में सक्षम था। साथ ही इस कंप्यूटर के साथ मॉनिटर भी उपलब्ध था। इस कंप्यूटर की शुरुआती कीमत 600 डॉलर थी।

एप्पल-2
इस कंप्यूटर को 1977 में एप्पल ने किया था। बाजर में यह कंप्यूटर 15 वर्षो तक रहा। यह बाजर में लांच हुआ पहला होम कंप्यूटर था, साथ ही सबसे ज्यादा मशहूर भी। कलर ग्राफिक्स के इस्तेमाल ने इस कंप्यूटर को एजूकेशन मार्केट में खासी सफलता दिलाई थी।

आईबीएम पीसी
1981 में आए इस कंप्यूटर की स्पीड तेज थी और आकार में पतला था। लेकिन इसने मार्केट में हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर क्षेत्र में मानक स्थापित किए थे जिनकी वृद्धि पर पहले प्रतिस्पर्धा के कारण रोक लग गई थी। इस पर्सनल कंप्यूटर के बाद जिस तरह के सॉफ्टवेयर और अन्य पुज्रो का निर्माण शुरू हुआ उसने आज इस्तेमाल हो रहे पर्सनल कंप्यूटर संबंधी सिस्टम की जमीन तैयार की।

वर्ष 1984 में इस कंप्यूटर के आने के बाद से पर्सनल कंप्यूटर के क्षेत्र में तेजी से बदलाव आए। इसमें एमएस-डॉस ऑपरेटिंग सिस्टम और तकरीबन सभी अन्य ऑपरेटिंग सिस्टम्स  के विपरीत कमांड लाइन इंटरफेस का इस्तेमाल किया गया था। व्यावसायिक तौर पर भी यह सफल रहा।

आईबीएम रोड रनर
सबसे तेज सुपरकंप्यूटर का खिताब ज्यादा देर संभाले रहना आसान नहीं था। लेकिन यह कंप्यूटर सबसे तेज की दौड़ में पहली ऐसी मशीन साबित हुआ जो प्रति सैकेंड एक क्वाडिर्लियन तक गणनाएं करने में सक्षम था। आकार में यह 1946 में बने ‘इनियाक’ कंप्यूटर से भी बड़ा है। लेकिन वह दिन दूर नहीं जब आमतौर पर डेस्कटॉप कंप्यूटर भी ऐसी गणनाएं करने में सक्षम होंगे।

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