class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

अब तक के जॉब

आपके सीवी में आपकी पिछली नौकरियों का विवरण जिस कॉलम में लिखा जाता है, नियोक्ता उस कॉलम को सबसे ज्यादा वक्त देकर, बड़े ध्यान से पढ़ता है। वह इसी से आपकी पेशेवर योग्यता और अपनी कंपनी में आपकी उपयोगिता का अंदाज लगाने की कोशिश करता है। जहिर है, आपको सीवी में अपनी जॉब हिस्ट्री का प्रस्तुतिकरण ऐसे फॉर्मेट में करना चाहिए कि वह नियोक्ता को अंदर तक अपील कर जाए। जॉब हिस्ट्री इस ढंग से देनी चाहिए कि इससे आपके अनुभव की सही तस्वीर भी सामने आ जाए, और जिस पद के लिए अर्जी दे रहे हैं, उसकी अपेक्षाओं को को पूरा करने वाली भी नजर आए।

तीन तरीके
जॉब हिस्ट्री को सीवी में पेश करने के तीन तरीके हैं। किस प्रारूप में पिछली नौकरियों का ब्यौरा देने से आपको कामयाबी मिलेगी, इसका फैसला आपको ही करना है।

- फंक्शनल सीवी : ये प्रारूप आमतौर पर उन लोगों के लिए सही रहता है, जो या तो पिछले कुछ समय से किसी वजह से सक्रिय रोजगार से अलग रहे हैं, या फिर करियर बदल रहे हैं। इसमें सिलसिलेवार नौकरियों की फेहरिस्त देने के बजय उम्मीदवार अब तक हासिल किए गए कुल अनुभव और हुनर का ब्यौरा देते हैं, और इसके आधार पर उचित पद और पैकेज की अपेक्षा रखते हैं। 
- क्रोनोलॉजिकल सीवी : अगर आप उसी तरह के जॉब की अर्जी दे रहे हैं, जिस तरह का जॉब वर्तमान में कर रहे हैं, तो आपको अपने करियर का तारीखवार ब्यौरा कंपनी और पद नाम के साथ उल्टे क्रम से पेश करना चाहिए। अर्थात नवीनतम जॉब को सबसे ऊपर रखें और उसके बाद उससे पहले के जॉब्स।  
- कॉम्बिनेशन सीवी : आजकल जॉब बदलते रहना आम ट्रेंड बन चुका है, ऐसे में उन जॉब्स का एक वर्ग बनाकर पेश करें, जिनमें आपने एक तरह का काम किया है। इसके साथ ही उन स्किल्स का ब्यौरा दें, जो आपने अलग-अलग जॉब्स में रहते हुए विकसित की हैं।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:अब तक के जॉब