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सैन्यकर्मियों को सोशल नेटवर्किंग साइट्स से हटने के निर्देश

सैन्यकर्मियों को सोशल नेटवर्किंग साइट्स से हटने के निर्देश

साइबर हमलों की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए सैन्य प्रतिष्ठान ने अपने अधिकारियों और जवानों को ऑरकूट और फेसबुक जैसी सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर अपनी आधिकारिक और संवेदनशील जानकारियों का खुलासा नहीं करने के निर्देश जारी किए हैं।


सेना के सूत्रों ने यहां बताया कि इस आशय का सकरुलर हाल ही में जारी किया गया है और अधिकारियों से अपेक्षा की गई है कि वे इस तरह की नेटवर्किंग साइट्स का इस्तेमाल करने के लिए लॉग ऑन करते समय अपनी रैंक, पोस्टिंग के स्थान और अन्य आधिकारिक विवरण नहीं बताएंगे। देशभर में सेना की यूनिटों को भेजे गए इस नोट में कहा गया है कि जिन अधिकारियों ने अभी तक इस प्रकार का ब्योरा अपने नेटवर्किंग एकाउंट्स में दिया हुआ है उसे वे हटा लें या परिवर्तित कर दें।


सैन्य प्रतिष्ठान का यह आदेश ऐसे समय आया है जब दुनियाभर में साइबर युद्ध का खतरा बढ़ रहा है और भारत का पड़ोसी देश चीन कई बार इस जंग में अपनी ताकत दिखा चुका है। सूत्रों ने बताया कि इस आदेश में अधिकारियों को सेना अधिनियम 63 की याद भी दिलाई गई है। जिसमें सेना के किसी भी आदेश और अनुशासन को तोड़ने पर पांच साल के कारावास तक की सजा हो सकती है। सूत्रों ने कहा कि इंटरनेटप्रेमी अधिकारी अक्सर शेखी बघारने के लिए अपने एकाउंटस में अपनी रैंक, तैनाती के स्थान और पद का ब्यौरा दे देते हैं और इस तरह वे खुद को और राष्ट्रीय सुरक्षा को जोखिम में डालते हैं।
 

सूत्रों ने कहा कि साइबर वॉर के इस दौर में ऐसे इंटरनेट हैकरों की कमी नहीं है जो इन अधिकारियों से मिले विवरण का दुरुपयोग आसानी से कर सकते हैं। इसके अलावा नेटवर्किंग में माहिर तत्व इन अधिकारियों से मेलमिलाप बढ़ाकर संवेदनशील जानकारी भी उगलवा सकते हैं। सैन्य बलों के करीब 35 हजार अधिकारियों में से मेजर, कैप्टन, लेफ्टीनेंट, कर्नल जैसी रैंक के उदीयमान अधिकारी सोशल नेटवर्किग साइट्स का जमकर इस्तेमाल कर रहे हैं और साइबर शत्रु इन्हें निशाना बना सकते हैं। इनके अलावा देश की विभिन्न रक्षा अकादमियों में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे युवा कैडेटों को भी इन साइबर शत्रुओं का कमजोर निशाना माना जा रहा है।


रक्षा अकादमियों को सैन्य प्रतिष्ठान ने इस दिशा में पूरी सावधानी बरतने की सलाह दी है और कैडेटों को साइबर वॉर के खतरों और इससे निपटने के उपयों के बारे में व्यापक जानकारी देने को कहा है। नोट में अधिकारियों और कैडेटों को यह भी निर्देश दिया गया है कि साधारण ईमेल एकाउंट खोलते समय भी वे अपना निजी ब्योरा न दें।
 सैन्य बलों में जारी इस ताजा आदेश को लेकर अधिकारियों के बीच नई टेक्नोलाजी के इस्तेमाल और उससे जुड़े़ खतरों को लेकर एक बहस भी छिड़ गई है। सेना के अनेक उदीयमान अधिकारी इसे पुरातन मानसिकता से प्रेरित मान रहे हैं और उनका कहना है कि हर नई टेक्नोलाजी नए फायदे और उतने ही नुकसान लेकर आती हैं। नुकसान से बचने के उपायों के बारे में यदि जानकारी के सत्र आयोजित किए जाएं तो बेहतर होगा।

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