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यशवंत का इस्तीफा, एक उदाहरण

आम चुनाव में मुँह की खाने वाली भाजपा में घमासान का एक और एपिसोड शनिवार को सामने आया। नेतृत्व पर खुलेआम कीचड़ उछालने वाले नेताओं को जहाँ पार्टी अध्यक्ष राजनाथसिंह ने दो टूक चेतावनी दे डाली, वहीं हाल के फैसलों से नाराज वरिष्ठ नेता और उपाध्यक्ष यशवंत सिन्हा ने अपने सभी पदों से इस्तीफा दे दिया। आलाकमान ने उनका त्यागपत्र मंजूर कर लिया है।

सिन्हा ने राजनाथ की प्रेस कांफ्रेंस से ऐन पहले बगावत का बिगुल फूँका। झारखंड के हजारीबाग से सांसद सिन्हा ने राजनाथ और पार्टी के कोर ग्रुप के सभी सदस्यों को चार पृष्ठ का पत्र भेजा है।


उन्होंने कहा कि वे पार्टी के कर्नाटक मामलों का प्रभार और भाजपा के विदेश मामलों के प्रकोष्ठ के प्रमुख का पद भी छोड़ रहे हैं।

सिन्हा ने कहा यदि जिम्मेदारी सामूहिक है। जैसा मैंने आपको अकसर कहते सुना है तो हम सबको पराजय की सामूहिक जिम्मेदारी लेना चाहिए। पार्टी खुद का कामराज प्लान लागू करे और सभी पदाधिकारी और संसदीय दल के सदस्य अपने अपने पदों से इस्तीफा दें। उसके बाद ये पद पार्टी विधान के अनुरूप चुनावी प्रक्रिया के जरिये भरे जाएँ।

सिन्हा ने कहा कि इस काम में मदद और सामूहिक जिम्मेदारी का सिद्धांत लागू करने के लिए वे उपाध्यक्ष पद, राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य और राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर की सभी जिम्मेदारियों से इस्तीफा देकर शुरुआत कर रहे हैं।

सिन्हा ने अरुण जेटली और लालकृष्ण आडवाणी के करीबी सुधीन्द्र कुलकर्णी पर निशाना साधते हुए कहा कि एक ओर पार्टी अपने प्रदर्शन की सही ढंग से समीक्षा से बच रही है तो दूसरी ओर जो लोग चुनाव प्रचार प्रबंधन के जिम्मेदार थे, उन्होंने अपना नजरिया पहले ही सार्वजनिक कर दिया है। इन्हीं लोगों ने अपना निष्कर्ष खुद ही निकालते हुए दोषारोपण किया तथा खुद को क्लीन चिट दे डाली।

गौरतलब है कि संसदीय दल ने आडवाणी को अपना नेता चुनकर अन्य पदाधिकारियों की नियुक्ति का अधिकार उन्हें दे दिया था। इसके बाद आडवाणी ने जेटली को राज्यसभा में विपक्ष का नेता और सुषमा स्वराज को लोकसभा में पार्टी का उपनेता नियुक्त किया।

 होगअनुशासनात्मकार्रवा : उधर, राजनाथ ने कहा कि पार्टी के कुछ नेताओं द्वारा मीडिया में व्यक्त विचारों और प्रतिक्रियाओं से धारणा बनी है कि नेतृत्व असमंजस में है और हार के कारणों का विश्लेषण नहीं कर रहा है, जो सच नहीं है।

उन्होंने कहा कि विभिन्न स्तरों पर चुनाव परिणामों के विश्लेषण की प्रक्रिया जारी है और अगस्त में चिन्तन बैठक में इन निष्कर्षों पर विचार किया जाएगा।

राजनाथ ने चेतावनी दी कि पार्टी के सभी नेता और कार्यकर्ता पार्टी से बाहर मीडिया या किसी अन्य मंच पर औपचारिक या अनौपचारिक रूप से पार्टी की आंतरिक गतिविधियों या ऐसे किसी भी विचार को प्रकट या संसूचित न करें, जिससे पार्टी की छवि पर नकारात्मक प्रभाव पड़े। ऐसा होने पर वे स्वतः अनुशासनात्मक कार्रवाई को आमंत्रण देंगे।

 

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