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कंगाली में भाजपा का आटा गीला

कंगाली में भाजपा का आटा गीला

भाजपा की बगावत सड़कों पर आ गई है। चुनाव के बाद कंगाली की हालत में हार के विश्लेषण से भाग रही भाजपा का पूर्व केन्द्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा के पार्टी आलाकमान पर किए गए हमले के बाद आटा काफी गीला हो गया है।

संघ परिवार भाजपा की हार के बाद मुरझाये कमल को खिलाने के लिए रोड-मैप तैयार कर ही रहा था कि पार्टी में बगावत का आलम यह हो गया कि कोई नेता किसी की बात सुनने को तैयार नहीं दिख रहा है। सिन्हा ने अध्यक्ष राजनाथ सिंह को लिखे अपने चार पेज के पत्र में पार्टी के लौह पुरुष लालकृष्ण आडवाणी और अध्यक्ष पर सीधा हमला बोला है।

उन्होंने पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र के खात्मे और हराऊ रणनीति बनाने वाले पार्टी महासचिव अरुण जेतली को पुरस्कृत करने और जमीनी नेताओं की उपेक्षा के गंभीर आरोप लगाते हुए पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पद, राष्ट्रीय कार्यकारिणी की सदस्यता तथा कर्नाटक के प्रभारी पद से अपना इस्तीफा दे दिया।

चार पेज के इस्तीफे में उन्होंने चुनावी हार के बारे में व्यापक और खुला आत्मावलोकन न करने के लिए पार्टी नेतृत्व को घेरे में लिया है। सिन्हा का इस्तीफा राजनाथ ने मंजूर कर लिया है। वर्ष 2005 में भी जिन्ना विवाद को लेकर आडवाणी के खिलाफ बागी तेवर अपनाने वाले सिन्हा ने कहा ‘मुझे अहसास हो रहा है कि एक बार फिर मौन की साजिश हो रही है।

हम अपनी कमजोरियों को गिनाने और जवाबदेही तय करने से बच रहे हैं।’ चौंका देने वाली बात यह है कि पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह जब दिल्ली में नेताओं से संयम बरतने, वरना अनुशासनात्मक  कार्रवाई झेलने को तैयार रहने की चेतावनी दे रहे थे, ठीक उसी समय यशवंत सिन्हा का बगावती पत्र सामने आया

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