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एटीएम जाली नोट दे तो करें आरबीआई से शिकायत

एटीएम जाली नोट दे तो करें आरबीआई से शिकायत

वैधानिक नोटों की जगह बैंक एटीएम खुद जाली नोट फेंकने लगे तो आपका न सिर्फ चक्कर में पड़ना लाजिमी है बल्कि लेनदेन के गोरखधंधे का शिकार हो जाना भी तय है। लिहाज, जाली नोट को संजीदगी से लेते हुये आपको तुरंत ही पुलिस अथवा आरबीआई का दरवाज खटखटाना चाहिये।

हाल ही में दिल्ली में कुछ एटीएम से ऐसे जाली नोट निकलने की कथित घटना के प्रकाश में आने के बाद इस पर चर्चा का बाजर गरम है और आम लोग इस चक्कर बाजी को लेकर खासे तनाव में है। लिहाज, इसकी प्रक्रिया और कानूनी राय समझना जरूरी है।

सबसे पहले तो आप यह समझ लें कि जाली नोट अवैध दस्तावेज है, बस इस पर सरकार की फर्जी मुहर लगी है। यानी भारत सरकार की मौद्रिक संप्रभुता (सॉवरेंटी) को चुनौती देने वाला दस्तावेज आपके हाथ में है और अगर आप इसका इस्तेमाल करते हैं तो यह सरासर गैर-कानूनी है जिस पर जांच-पड़ताल के बाद आपके खिलाफ सख्त कार्रवाई तय है।

आपको बता दें कि बैंकों के एटीएम में नोटों को पहुंचाने के पहले उन्हें सार्टिग मशीन से होकर गुजरा जाता है। यह मशीन ऐसी होती है जो जाली नोटों को अपने आप ही अलग कर देती है। अब अगर सार्टिग के बाद ही बैंक के किसी कर्मचारी ने सही नोट हटाकर जाली नोट रख दिये तो कोई कुछ नहीं कर पाएगा क्योंकि जांच में सार्टिग मशीन का दस्तावेज यही बताएगा कि नोट सही थे।

आपको एटीएम से जाली नोट मिले, आपके बैंक के खिलाफ केस किया तो उसका प्रमाण होना चाहिए कि वे नोट उसी एटीएम के हैं। नोट में ऐसा कुछ लिखा नहीं होता है। दूसरी ओर पंजब नेशनल बैंक के सीएमडी डा.के.सी. चक्रबर्ती ने इस पर नया तर्क रखते हुये का कि जाली नोट का हल्ला मचाने वाले के पास इसका क्या प्रमाण है कि यह नोट किसी खास एटीएम का ही है।

बहरहाल बैकिंग विशेषज्ञों की राय मानें तो उसी में भलाई है। उनके मुताबिक इसके कानूनी पचड़े में फंस कर अपनी फजीहत कराने की जगह आपको इनका इस्तेमाल न करते हुये या तो घाटा सहना होगा या फिर तुरंत स्थानीय पुलिस में पास एफआईआर यानी प्राथमिक सूचना रिपोर्ट दर्ज करानी होगी।

दूसरी ओर इसके लिए रिजर्व बैंक का काउंटर है। वहां आप नोट जमा करने के साथ शिकायत भी दर्ज करा सकते हैं।

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