class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

जासूस के हाथ राजनय की कमान

ऑस्ट्रेलिया की पहचान कंगारुओं और क्रिकेट के लिये दुनिया भर में है। तीन बार से क्रिकेट वर्ल्ड कप चैंपियन है ऑस्ट्रेलिया। क्रिकेट के दीवानों के देश ऑस्ट्रेलिया की आजकल चर्चा वहां भारतीयों पर हो रहे नस्ली हमलों को लेकर हो रही है।

संसद से सड़क तक हमलों का विरोध हो रहा है। इस बीच अच्छी खबर यह है कि ऑस्ट्रेलियाई दूतावास में नये हाई कमिश्नर पीटर वर्गीज की नियुक्ति हुई है। पीटर के माता-पिता भारतीय हैं। पीटर कीनिया में जन्मे हैं। बचपन में ही वे ऑस्ट्रेलिया चले गये थे।

वर्गीज ने क्वीन्सलैंड यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया है। उनका एक जवान बेटा है। माना ज रहा है कि ऑस्ट्रेलिया में भारतीय छात्रों पर हो रहे हमलों की समस्या को वह भारतीय परिप्रेक्ष्य से भी समझने की कोशिश करेंगे। सिक्के का यह एक पहलू है। दूसरा पहलू भी कम महत्वपूर्ण नहीं हैं। पीटर मौजूदा समय में ऑस्ट्रेलियाई खुफिया एजेंसी नेशनल एसेसमेन्ट के प्रमुख हैं।

एजेन्सी का मुखिया सीधे प्रधानमंत्री को रिपोर्ट करता है। वश्विक राजनयिक व्यवस्थाओं को देखते हुए यह अटपटा नहीं है। दुनिया के लगभग सभी देश अपने दूतावासों में इंटेलिजेंस एजेंसियों के लोगों को तैनात करते हैं। अमेरिका का दुनिया का सबसे बड़ा दूतावास भारत में है। दक्षिण एशिया में भारत की स्थिति और अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी मोर्चाबंदी को देखते हुए यह अस्वाभाविक नहीं है।

पीटर वर्गीज की नियुक्ति इसी बात का संकेत दिखती है।  इंडोनेशिया, हांगकांग, मलेशिया और बहुत हद तक चीन के मामले में सूचनाएं संकलित करने के मामले में अमेरिका एक सीमा तक ऑस्ट्रेलिया पर निर्भर है। ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और अमेरिका जसूसी और सैन्य मामले में प्रोजेक्ट इकलॉन के तहत भागीदार हैं। इस प्रोजेक्ट के तहत पूरी दुनिया में टेपिंग, फोन बातचीत, ई-मेल पर निगरानी रखी जती है।

इस दृष्टि से पीटर वर्गीज की ऑस्ट्रेलियाई दूतावास में मौजूदगी काफी महत्वपूर्ण होगी। आतंकवाद को लेकर भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच खुफिया सूचनाओं के क्षेत्र में अच्छी साङोदारी हो सकती है। 53 वर्षीय वर्गीज ऑस्ट्रेलिया के वरिष्ठ डिप्लोमेट हैं। ऑस्ट्रेलियाई खुफिया एजेंसी प्रमुख होने से पहले वर्गीज सन् 2000 से 2002 तक मलेशिया में हाई कमिश्नर रहे हैं।

इसके अलावा वे विएना, वाशिंगटन और टोक्यो में भी ऑस्ट्रेलियाई मिशन के महत्वपूर्ण हिस्से रहे हैं। वर्गीज 1997 में इंटरनेशनल सिक्योरिटी डिवीजन में असिस्टेंट सेक्रेटरी और 1998 में प्रधानमंत्री कार्यालय और कैबिनेट से संबद्ध इंटरनेशनल डिवीजन में फस्र्ट असिस्टेंट सेकेट्ररी रहे हैं। वर्गीज अगस्त 2009 में भारत में अपना कार्यभार संभालेंगे।

भारत में आते ही उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती करोड़ों डॉलर के एजुकेशन बिजनेस को बचाने की होगी। भारतीय छात्रों पर हो रहे नस्ली हमलों से इस क्षेत्र में उसकी छवि काफी खराब हुई है। खराब माहौल में सैन्य, व्यापारिक और साउथ एशिया में दोनों देशों की शांति और सुरक्षा को लेकर सहभागिता को भी आगे बढ़ाना वर्गीज के लिये काफी टेढ़ा काम होगा। देश में वहां छात्रों पर हो रहे हमलों से काफी बेचैनी और नाराजगी का माहौल बना है।

 

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:जासूस के हाथ राजनय की कमान