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जल संस्थान के कर्मियों पर कतई भरोसा न करें

पेयजल कर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल भले ही सोमवार से है, लेकिन जनता जल संस्थान पर कतई भरोसा न करे। स्वयं जल संस्थान के अधिकारियों ने जनता से अपील की है कि वे रविवार से ही पानी भरना शुरू कर दे। हड़तालियों कर्मियों के तेवरों और उनकी गुप्त रणनीति पर भरोसा करें तो रविवार को ही पेयजल सिस्टम प्रभावित हो जाएगा और हड़ताल के दौरान सिस्टम का ठप होना तय है।


हड़ताली कर्मियों की इस हुंकार से महकमा सहमा हुआ है। हड़ताल से निपटने को लेकर एक सप्ताह से चल रही मशक्कत के बाद शनिवार को महकमा इसी नतीजे पर पहुंचा की वैकल्पिक व्यवस्था के सहारे लोगों को बहुत अधिक दिन तक पानी नहीं पिलाया जा सकता। इस संकट को भांपते हुए महाप्रबंधक मुख्यालय वीके सिन्हा ने जनता की पेयजल बचत की अपील जारी की है। उन्होंने अपील में कहा कि हड़ताल के कारण पैदा होने वाले पेयजल संकट से बचने को जनता पानी का दुरुपयोग न करे और अपनी जरूरत अनुसार स्टोर करे। ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके।


दूसरी ओर उत्तराखंड निकाय कर्मचारी महासंघ से जुड़े जल संस्थान के मुलाजिमों ने हड़ताल के दौरान सरकार को नाकों चने चबवाने का मन बना लिया है। इसके लिए जगह जगह कर्मचारियों की गुप्त मंत्रणा चल रही है। पेयजल व्यवस्था ठप करने को गुप्त रणनीति तैयार हो रही है। सूत्रों पर यकीन करें तो रविवार दोपहर से सिस्टम को पटरी से उतारने की तैयारी शुरू हो जाएगी। ऐसे स्थानों पर लाइनों को प्रभावित किया जाएगा, जहां अधिकारी जल्द फॉल्ट भी न तलाश पाएं। वीरवार को कार्य बहिष्कार के दौरान कर्मचारी ट्रेलर दिखा चुके हैं।
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सड़कों पर छूट जाएंगे कूड़े के ढ़ेर
सोमवार से नगर निगम के स्थायी कर्मचारी हड़ताल पर हैं। स्थायी चालक वाहन नहीं चलाएंगे, ऐसे में कूड़े के वाहन नहीं चल पाएंगे। नियमित कर्मचारी हड़ताल के दौरान संविदा व दैनिक वेतनभोगी वाहन चालकों को भी वाहन चलाने से रोकेंगे। ऐसे में शहर में हर दिन साढ़े तीन सौ मीट्रिक टन कूड़ा सड़कों पर ही छूट जाएगा। नालियां गंदगी से अटी रहेंगी और सड़क, चौराहों पर भी कूड़े के ढ़ेर लगे रहेंगे। हालांकि अभी सफाई कर्मचारी संघ ने स्वयं को हड़ताल से बाहर रखा है, लेकिन उनके भी जल्द हड़ताल में शामिल होने की उम्मीद जताई जा रही है। यदि ऐसा हुआ तो जल्द शहर कूड़े के ढ़ेर में तब्दील नजर आएगा।

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