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भाजपा-सपा के हंगामे से सदन की बैठक स्थगित

नगर निगम कार्यकारिणी चुनाव के लिए शुक्रवार को बुलायी गयी बैठक सदस्यों के भारी हंगामे के चलते स्थगित कर दी गयी। भाजपा-सपा के बीच जोर आजमाइश होती कि बीच में ही पूर्व मेयर स्वालेह अंसारी एवं पूर्व डिप्टी मेयर देवदत्त तिवारी के शोक प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान ही शोर-शराबा शुरू हो गया। हंगामा नहीं थमा तो मेयर कौशलेन्द्र सिंह ने बैठक स्थगित करने की घोषणा कर दी। नाटकीय घटनाक्रम यह हुआ कि मेयर समेत भाजपा सदस्यों के जाने के बाद सपा सभासद दल के नेता ओपी सिंह की ‘अध्यक्षता’ में हुई ‘बैठक’ शुरू हो गयी। इस बैठक में प्रस्ताव पारित कर 31 दिसंबर तक बैठक स्थगित करने की घोषणा कर दी गई। अब मामला और पेंचीदा फंस गया है। मेयर की ओर से शनिवार को फिर बैठक बुलायी गयी है जबकि नगर आयुक्त डॉ नन्द किशोर ने विधिक राय का हवाला देते हुए कहा कि बैठक दिसंबर तक स्थगित की जा चुकी है तो बीच में बैठक बुलाने का कोई औचित्य नहीं है। इसके चलते निगम में वैधानिक संकट की स्थिति भी आ गयी है।


नगर निगम कार्यकारिणी के चुनाव के लिए ही शनिवार की बैठक बुलायी गयी थी। बैठक अपने नियत समय से शुरू हुई। इसी बीच पहला प्रस्ताव बसपा के नामित सदस्य प्रदीप मौर्य का आया। वह काम रोको प्रस्ताव लाए। दूसरा प्रस्ताव मनोज राय धूपचंडी की ओर से आया। उनका कहना था कि जब लोकसभा की कार्यवाही चल रही होती है तो नियमानुसार बैठक नहीं बुलायी जा सकती। शोर शराबे के बीच ही पूर्व मेयर एवं पूर्व डिप्टी मेयर के निधन पर श्रद्धांजलि देने के लिए शोक प्रस्ताव आया। शोर शराबे में शोक प्रस्ताव ठीक से नहीं पढ़ा जा सका। देर तक हंगामे के कारण मेयर ने बैठक स्थगित करने की घोषणा कर दी। मेयर और सभी भाजपा सभासदों ने सदन छोड़ दिया। इसी बीच मनोज राय ने ओपी सिंह के नाम का प्रस्ताव किया और उन्होंने बैठक की अध्यक्षता शुरू कर दी। सपा का कहना है कि उस वक्त सदन में 55 सदस्य उपस्थित थे और बतौर अध्यक्ष ओपी सिंह ने 31 दिसंबर 09 तक बैठक स्थगित करने की घोषणा कर दी।


नगर निगम में दरअसल सियासी गोटी फिट करने के लिए शह-मात का खेल शुरू हो गया। कार्यकारिणी के 6 सदस्यों के चुनाव के लिए संख्या बल में फिलहाल भाजपा बीस पड़ रही थी। उसके सभासदों की संख्या 38 है और सांसद, विधायक एवं विधान परिषद सदस्यों को जोड़कर उसकी संख्या पांच और बढ़ जाती है। दूसरी ओर सपा के पास सभासदों की संख्या 31 है और चंदौली के एमपी व एक एमएलए के साथ यह संख्या 33 हो जाती है। सपा ने एक दांव खेला था। बसपा के दस सभासदों के बूते उसने भाजपा को मात देने की तैयारी की थी। मेयर भाजपा के ही हैं और उन्होंने हाईकोर्ट के ताजा आदेश को आधार बनाकर बसपा सदस्यों को वोटिंग से बाहर रखने का रास्ता ढूंढ लिया था। परन्तु नगर आयुक्त के पास अभी हाईकोर्ट के फैसले की प्रति पहुंची ही नहीं थी। लिहाज मामला पेंचीदा हो गया। जब तक नगर आयुक्त आधिकारिक रूप से घोषणा नहीं करते हाईकोर्ट के फैसले का क्रियान्वयन मुश्किल था। ले-दे कर सदन में सपा की गणित गड़बड़ा रही थी। कार्यकारिणी सदस्यों को ही उपसभापति का चुनाव करना है। अगर सपा पीछे रह जाती तो उपसभापति की लड़ाई में वह मात खा जाती।


मेयर व नगर आयुक्त आमने-सामने
सदन की बैठक बुलाने के मामले पर मेयर कौशलेन्द्र सिंह व नगर आयुक्त डॉ नन्दकिशोर फिर आमने-सामने हो गए हैं। कौशलेन्द्र सिंह ने शनिवार को फिर बैठक बुलायी है जबकि नगर आयुक्त का साफ कहना है कि बैठक नहीं हो सकती। बैठक बीच में अटक गई है।

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  • Web Title:भाजपा-सपा के हंगामे से सदन की बैठक स्थगित