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नाजुक कलाइयों में दमदार किरदार..

नाजुक कलाइयों में दमदार किरदार..

नमक हराम की स्वाति सहगल
रियल चैनल पर आने वाला सीरियल ‘नमक हराम’ यूं तो एक प्रेम कहानी है, जिसमें नारायणी शास्त्री (स्वाती सहगल) ने एक ईमानदार आईएएस अफसर की भूमिका निभाई है। पर इस शो में नारायणी का किरदार उनके पिछले किरदारों से काफी अलग है।
इससे पहले नारायणी सास-बहू सरीखे धारावाहिकों से अच्छा नाम कमा चुकी हैं। ‘नमक हराम’ में उनके अभिनय की विविधता के साथ उसमें एक तरह का सशक्तिकरण और पावर झलकती है। सीरियल की कहानी पर गौर करें तो स्वाति और करण की शादी पांच साल पहले हुई। स्वाति सहगल फर्ज के आगे कुछ नहीं देखती, जबकि करण के पिता जो बहुत बड़े उद्योगपति हैं, स्वाति को अपना बिजनेस बढ़ाने के लिए इस्तेमाल करना चाहते हैं। स्वाति कॉरपोरेट जगत के षड्यंत्र में फंसती चली जाती है और उसे पता चलता है कि वो अपने पति के  हाथों इस्तेमाल की जा रही है। स्वाति आज उन तमाम औरतों की कहानी है, जो परिवार और समाज के डर के कारण अपनी आवाज नहीं उठा पाती हैं। लेकिन स्वाति सहगल अपने पक्के उसूलों के चलते इस मिथक को तोड़ती है। इसलिए शायद इस किरदार को दर्शकों में खासा पसंद किया जा रहा है। उस शो में नारायणी का किरदार राजनीति, समाज और कॉरपोरेट जगत के बीच एक महिला के अंदरूनी मन की जद्दोजहद दर्शाता है, जिसमें कई जगह उसकी वो शक्ति भी दिखाई देती है, जिससे वह कभी-कभी अनजान रहती है। एक मल्टीनेशनल कंपनी में कार्यरत कपिल का कहना है, ‘मौजूदा समय में महिलाओं पर दिखाए जा रहे तमाम धारावाहिकों के बीच यह एक अलग तरह का सीरियल है, जिसमें मुख्य किरदार को पुरुषों की इस दुनिया में डटे हुए दिखाया ज रहा है। मैं इसे देखना पसंद करता ह़ूं, क्योंकि ये कुछ अलग हटकर है।’

लेडी गैंगस्टर राजूबेन
सोनी के ‘राजूबेन’ में शिल्पा शुक्ला एक लेडी गैंगस्टर के रूप में दिखाई दीं। संभवत: टीवी पर यह पहला मौका था जब किसी महिला के हाथों में पिस्तौल को इस तरह से दिखाया गया था। यह भी कहा जा सकता है कि टीवी सीरियलों में ऐसे  रोल अब से पहले नहीं देखे गये। शायद दर्शक भी सास-बहू वाले महिला किरदारों से उब चुके थे। उन्हे भी महिलाओं के इसी तरह के किरदारों का इंतजार था। इस सीरियल में राजूबेन की बीस साल पहले की जिंदगी से शुरुआत होती है। इसमें तीन दशकों की कहानी को दिखाया गया है।
 
राजूबेन गांधीवादी विचारधारा के परिवार से संबंध रखती है। उसके पिता राजनीतिक षड्यंत्र के चलते एक पुलिस एनकाउंटर में मारे जाते हैं। उनकी मौत का बदला लेने के लिए राजूबेन एक गैंगस्टर से शादी कर लेती है। राजूबेन के अपराध की दुनिया में आने के बाद उसके दो जुड़वां बेटे होते हैं। कहानी में मोड़ तब आता है, जब वो खुद अपने एक ड्रग एडिक्ट बेटे को मार देती है।

इस सीरियल की अभिनेत्री शिल्पा को इस तरह के रोल का कोई अनुभव नहीं था। बकौल शिल्पा, ‘यह किरदार मेरे लिए काफी अहम था। इसमें एक तरह की पावर थी, जिसे मैंने महसूस किया। नेगेटिव होने के बावजूद लोग इसे पसंद कर रहे हैं।’  शिल्पा इससे पहले शाहरुख खान के साथ ‘चक दे इंडिया’ में बिंदिया का किरदार निभा चुकी हैं।

एक यह भी है सीता और गीता
70 के दशक में हेमा मालिनी की फिल्म ‘सीता और गीता’ से प्रेरणास्रोत्र माने जा रहे धारावाहिक ‘सीता और गीता’ में अंजोरी अलघ डबल रोल में हैं। जहिर है कि सीता से ज्यादा लोगों में गीता के किरदार को लेकर उत्सुकता दिख रही है। क्योंकि यह किरदार काफी
बोल्ड है। वह बात कम करती है और लाठी ज्यादा चलाती है। गीता के किरदार में  रोमांस, हंसी-मजक, ड्रामा और थ्रिल भी  भरपूर है।

बदला ट्रेंड
सैटेलाइट युग की शुरुआत के साथ जब भारत में धड़ाधड़ सीरियल्स और शोज की बरसात हुई तो सबसे पहले पारिवारिक पृष्ठभूमि पर आधारित सास-बहू के भव्य शोज ने दर्शकों के बीच अपनी जगह बनाई। इनके बीच कभी बहू का रोना-धोना पॉपुलर हुआ तो कभी ननद-देवरानी की साजिशों ने लोगों के दिलों पर राज किया। यह सिलसिला लंबा चला, लेकिन अब दर्शकों को महिला किरदारों में चेंज चाहिये, जिसे विभिन्न चैनल परोस भी रहे हैं।

पिछले कुछ समय से टीवी शोज में काफी बदलाव देखे जा रहे हैं। सीरियलों में महिलाओं के वही पुराने सास-बहू के ड्रामे से परे अब महिला किरदारों का एक नया रूप देखा जा रहा है, जो इस बात का आभास कराता है कि इन कलाइयों को नाजुक समझने की भूल कतई न करना। सीरियलों मेंमहिला किरदारों को गहनों से सजी-धजी दिखाने के बजए उनके हाथों में अब सत्ता की शक्ति और अपने हक के लिए बुलंद आवाज की लाठी दिखाई दे रही है।

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