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लपेटे में आये सब

लपेटे में आये सब

मोटे तौर पर करीब दो महीने तक चली मल्टीप्लेक्स मालिकों और फिल्म निर्माताओं के बीच चली हड़ताल किसी तरह से पिछले सप्ताह समाप्त तो हो गयी, लेकिन एक बड़े नुकसान के साथ। इंडस्ट्री पहले से ही आर्थिक मंदी के बोझ से दबी थी। ऐसे में हड़ताल के कारण फिल्में रिलीज नहीं हुईं और इंडस्ट्री पर दबाव बढ़ता गया। साल के मध्य में शुरू होने वाले बड़े प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में चले गये और इस दौरान रिलीज होने वाली फिल्मों के सफल होने पर भी संशय होने लगे। दो पक्षों के बीच की खटास आखिर 300 करोड़ रुपये के नुकसान के बीच मिठास में तो बदली, लेकिन अब दिक्कत उन्हीं शर्तो पर मुनाफा कमाने की है। हालांकि दर्शकों के लिए एक अच्छी खबर यह है कि उन्हें अब फिर से बड़े सितारों की नई फिल्में देखने को मिल सकेंगी। और दूसरी अच्छी खबर यह कि उन्हें तकरीबन हर दूसरे या तीसरे हफ्ते एक बड़ी फिल्म के दर्शन होंगे। तो पहले एक नजर उन फिल्मों पर, जो हड़ताल के कारण अटकी पड़ी थीं। इनमें सबसे पहले नाम निर्माता वाशु भगनानी की फिल्म ‘कल किसने देखा है’ का है, जिसके माध्यम से वह अपने बेटे जैकी भगनानी को लॉन्च करने जा रहे हैं। 10 जुलाई को अक्षय कुमार की इस साल की दूसरी सबसे बड़ी फिल्म कमबख्त इश्क रिलीज होगी। ‘चांदनी चौक टू चाइना’ और ‘8 x10’ के पिटने के बाद यह फिल्म अक्षय के आगे का भविष्य तय करेगी। इस फिल्म पर एक बड़ी रकम के साथ बॉलीवुड के साथ-साथ हॉलीवुड सितारों की जुगलबंदी भी दांव पर लगी है। इसके बाद जुलाई में ही रामगोपाल वर्मा के बैनर वाली फिल्म अज्ञात, निर्माता निर्देशक विशाल भारद्वाज की फिल्म ‘कमीने’ और महीने के अंत में निर्देशक इम्तियाज अली की फिल्म ‘लव आज कल’ भी रिलीज होगी। इस लिहाज से जुलाई का महीना बॉलीवुड के लिए काफी अहम माना जा रहा है। सूत्र बताते हैं कि इन सभी बड़ी फिल्मों पर करीब 250 करोड़ रु. से ज्यादा लगे हुए हैं। अगर इनमें से दो फिल्में सुपरहिट और बाकी सेमी हिट भी हो गयीं तो बॉलीवुड की बल्ले-बल्ले है। इंडस्ट्री के प्रमुख बैनर यशराज कैंप की ‘न्यूयॉर्क’ इसी माह के अंत में रिलीज होगी। जॉन अब्राहम, कैटरीना कैफ और नील नितिन मुकेश वाली इस मूवी की 26 जून फिक्स की गयी है। हालांकि फिल्मों के प्रदर्शन के हिसाब से तय किये गये मुनाफे के बंटवारे का समझौता कितना कारगर रहा यह तो आने वाले तीन चार दिनों में पता ही चल जाएगा। जनकारी के अनुसार मुनाफे के बंटवारे का प्रतिशत पहले हफ्ते में 50 फीसदी, दूसरे हफ्ते में 42.5, तीसरे हफ्ते में 37.5 तथा चौथे हफ्ते तक आते-आते 30 फीसदी तक रहेगा। पर यह समझोता उन बड़ी फ्लॉप फिल्मों पर लागू नहीं होता, जिनकी कमाई 10 करोड़ रुपये से नीचे होगी। इसके अलावा अगर कोई फिल्म मुनाफे की दर 17.5 करोड़ रु. का आंकड़ा पार कर जती है तो बड़े मल्टीप्लेक्स उपरोक्त बंटवारे की दर में पहले और दूसरे हफ्ते के दौरान 2.5 से 3 फीसदी की दर से मुनाफे के हिस्से में दावेदारी पेश करेंगे।

बेशक मुनाफे की दर के आंकड़ों का खेल यह काफी कंफ्यूजन क्रिएट करता है, जिससे दर्शकों को शायद ही कोई मतलब हो, लेकिन दो महीने के सूखे ने यह साफ कर दिया है कि अब लोगों को नई और मनोरंजन से भरपूर फिल्में चाहिये। लेकिन मनोरंजन की यह बयार इन छह महीनों में कहीं ओवरडोज साबित न हो जाए।

हड़ताल से नुकसान दोनों पक्षों को हुआ। कोई छोटा-मोटा नहीं, बल्कि करीब 300 करोड़ रुपये का चूना इंडस्ट्री को लगा। इस दौरान बेशक फिल्में रिलीज हुईं, लेकिन मुनाफे की कम दर ने सबको लपेटे में ले लिया। यानी चने के साथ घुन भी पिसा। अब नई फिल्में फिर से रिलीज हो रही हैं, लेकिन साल के शुरुआती छह महीने इंडस्ट्री को तगड़ा झटका दे गये।

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