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विधि मंत्री ने की आईपीसी की धारा 377 को खत्म करने की वकालत

विधि मंत्री ने की आईपीसी की धारा 377 को खत्म करने की वकालत

विधि मंत्री ने आईपीसी की धारा 377 को पुराना बताकर न सिर्फ अपनी ही पिछली सरकार के स्टैंड का विरोध किया है बल्कि उन्होंने समलैंगिकता को अपराध बना रहने देने के मंत्री समूह के स्टैंड की भी मुखालफत की है।

सरकार के समलैंगिकता विरोधी इस अंतिम रुख पर पूर्ण बहस के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने अक्तूबर में फैसला सुरक्षित रखा था। केस से जुड़े अधिवक्ताओं का मानना है कि शायद विधि मंत्री वीरप्पा मोइली को पूर्व सरकार द्वारा गठित मंत्रिसमूह के स्टैंड की जानकारी नहीं है।ऐसा होता तो वह बयान नहीं देते, क्योंकि मंत्रिसमूह का स्टैंड सरकार का अंतिम स्टैंड था।

केस से जुड़े एक अधिवक्ता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि मंत्री का यह बयान उचित नहीं है क्योंकि सरकार के रुख पर बहस के बाद कोर्ट फैसला सुरक्षित रख चुका है।यदि सरकार  अड़ी रही और नया शपथपत्र दायर किया तो मामले पर नए सिरे से सुनवाई होगी।

दरअसल यह मामला शुरू से ही विवादास्पद रहा है। सरकार में भी दो विभागों की राय इस मामले में अलग-अलग थी। पूर्व स्वास्थ्य मंत्री का कहना था कि समलैंगिकता को अपराध ठहराने वाली आईपीसी की धारा 377 को रद्द कर देना चाहिए जबकि मंत्रालय इस धारा के बने रहने के पक्ष में था।

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  • Web Title:समलैंगिकता पर केंद्र सरकार नरम