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बुरा मानो या भला : उम्मीदें मनमोहन के मंत्रियों से

अगले पांच साल देश पर राज करने के लिए सरकार बना ली गई है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मिल कर अपने मंत्री चुन लिए हैं। ये मंत्री अच्छे-खासे टैलेंटेड हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों से आए हैं। अलग-अलग धर्मो को माननेवाले हैं उनमें कई बेहद तजुर्बेकार नेता हैं। वह अपना काम बखूबी जानते हैं।

कुछ नौसिखिए भी हैं। सैकड़ों सालों से हमारी जिंदगी पर गरीबी, अशिक्षा और निरक्षरता अभिशाप की तरह छाई रही है। हमें उम्मीद करनी चाहिए कि ये लोग उसे मिटाने की कोशिश करेंगे। और हिंदुस्तान को बेहतर बनाएंगे। 

मनमोहन के इस मंत्रिमंडल को लेकर मुङो दो दिक्कतें हैं। एक तृणमूल कांग्रेस की ममता बनर्जी को लेकर है। दूसरा तमिलनाडु की डीएमके से जुड़ा है। ममता गुस्सैल हैं। तुनुकमिजज हैं। जल्दबाजी में रहती हैं। बहुत जल्द उखड़ जती हैं। आप उनके बारे में शर्तिया कुछ नहीं कह सकते। वह क्या कर बैठेंगी, वही जनती हैं। फिर उनकी प्राथमिकता रेलवे तो नहीं है।

वह तो बंगाल से कम्युनिस्ट सरकार का सफाया करना चाहती हैं। उसके लिए उन्हें कोलकाता में ही रहना होगा। वहीं रहना चाहेंगी भी वह। रेलवे तो दिल्ली से चलती है। उसके लिए उनके पास शायद ही वक्त होगा। यों भी वह मंत्री पद को कुछ नहीं समझती हैं।

न ही उससे मिलने वाले पैकेज से उन पर कोई असर पड़ता है। वह तो जब चाहे इस्तीफा दे डालती हैं। ममता तो अपनी धुन में ही रहती हैं। वह सचमुच नहीं जनतीं कि एक टीम में कैसे रहा जता है? इस टीम में वह क्या-क्या करती हैं, उस पर मेरी नजर रहेगी।

एम. करुणानिधि एक अलग दिक्कत हैं। वह सोनिया और मनमोहन को परेशान करते रहे हैं। अब उनकी तीन बीवियां हैं। उन बीवियों के बच्चे हैं। उन्हें उन सबको सरकार में फिट करना है। उनका हाल देख कर मध्यकालीन वक्त याद आता है। उन्हें बस अपना ही राज और वंश नजर आता है। उनके बच्चे कैसा काम-काज करते हैं, उस पर प्रधानमंत्री को तीखी निगाह रखनी होगी।

अपनी नई सरकार के बारे में एक अच्छी बात मुङो यह लगी कि राहुल गांधी ने उसमें शामिल होने से मना कर दिया। वह बाहर रह कर काम करना चाहते हैं। पार्टी को मजबूत बनाना चाहते हैं। उन्हें पार्टी का आधार बढ़ाना है। नए कार्यकर्ताओं को जोड़ना है। फिर वह सरकार पर निगाह भी रखेंगे। यानी देखेंगे कि लोगों की उम्मीदों के मुताबिक काम हो रहा है या नहीं!

गौ जल

फिलहाल बीजेपी बुरे हाल में है। वह जब भी बेहाली में होती है, तो अपने पैतृक संगठन आरएसएस की ओर देखने लगती है। अब ठीक यही बीजेपी कर रही है। नीचे एक खबर दे रहा हूं। यह ‘इंडियन एक्सप्रेस’ में कुछ दिन पहले छपी थी। मैं उसे देख नहीं पाया।

लंदन के ‘प्राइवेट आई’ में उसे 29 मई को फिर से छापा गया। यह उनके कॉलम ‘फनी ओल्ड वर्ल्ड’ में छपा। मुङो भी वह बेहद मजेदार लगा। जरा आप भी गौर फरमाइए- आरएसएस के ओमप्रकाश ने हरिद्वार में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा है कि दवाई के तौर पर गौ मूत्र के इस्तेमाल को लोगों ने अब मान लिया है। एक तरह की क्रांति होने ज रही है। हम उसे गौ जल कहते हैं। गाय का जबर्दस्त जल. जल से बड़ी-बड़ी बीमारियां ठीक हो सकती हैं।

हमने हाल ही में एक सॉफ्ट ड्रिंक भी बनाया है, कोका कोला की तरह। उसका आधार गाय का जल होगा। लखनऊ की लेबोरेटरी में उसे जंच के लिए भेज गया है। एक बार वह कोल्ड ड्रिंक के तौर पर बोतलों और डिब्बों में आने लगेगा, तो उसकी मांग जरूर बढ़ जएगी। ओमप्रकाश आरएसएस की गौ रक्षा समिति के अध्यक्ष हैं। उनका मानना है कि गौ जल कोला जल्द ही हिंदुस्तानी बाजर में छा जएगा।

‘बाजर में मिलने वाले कोला कई मामलों में सेहत को नुकसान पहुंचाने वाले हैं। उनमें कीटनाशक होते हैं। गौजल तो बिल्कुल कुदरती है। फिर वह सस्ता भी है। मैं गौ मूत्र के प्रचार में पिछले 40 सालों से लगा हूं। मुङो गर्व है कि उसका इस्तेमाल हर चीज में हो रहा है। वह बिस्कुट से लेकर टूथपेस्ट बनाने तक में काम आ रहा है। उससे साबुन और पाउडर भी तैयार हो रहा है।

अभी उसकी बदबू पर काम हो रहा है। वह गरमी में बदबू फैलाता है। उस पर काबू पाने के बाद गौ जल कोला कमाल का ड्रिंक हो जएगा। भारतीय संस्कृति में पवित्र गाय की एक खास जगह है। इस काम से साबित होगा कि गाय को क्यों अपने यहां इतनी ऊंची जगह दी गई है।

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