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घाटी में विश्वास

सोपियां के मामले पर चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच केंद्रीय गृहमंत्री पीसी चिदंबरम का यह कहना कि कश्मीर में कानून-व्यवस्था कायम करने की मुख्य जिम्मेदारी राज्य पुलिस के हवाले की जाएगी और केंद्रीय बल उसकी सहायक भूमिका निभाएंगे, जहां जनाक्रोश को शांत करने का प्रयास है वहीं घाटी में बन रही बेहतर स्थितियों के प्रति विश्वास को भी दर्शाता है।

हालांकि उन्होंने विशेष अधिकार अधिनियम को हटाने की मांग को मानने से इंकार कर दिया है, पर केंद्रीय सुरक्षा बलों को कार्रवाई की आचार संहिता के पालन और मानवाधिकार के हिफाजत की सख्त हिदायत दी है। दरअसल पिछले साल इन्हीं दिनों अमरनाथ यात्रा के दौरान गुफा के पास श्राइन बोर्ड को जमीन आवंटन के सवाल पर कश्मीर बुरी तरह अशांत हो उठा था, पर केंद्र सरकार की सूझ-बूझ से स्थितियां फिर सुधरीं।

इसीलिए केंद्र और राज्य दोनों सरकारें अमरनाथ यात्रा और पर्यटन के इस मौसम में छाछ को भी फूंक मार कर पी रही हैं। केंद्रीय सुरक्षा बलों और राज्य पुलिस के बीच इस भूमिका अदला-बदली का क्या स्वरूप होगा, यह एकीकृत कमान की बैठक करने गए गृहमंत्री ने स्पष्ट नहीं किया है। सैद्धांतिक तौर पर इतना ही कहा गया है कि सुरक्षा संबंधी मामले देखना सेना और अर्धसैनिक बलों का काम है और कानून-व्यवस्था पुलिस के अधिकार क्षेत्र का मसला है।

जहिर है सेना और अर्धसैनिक बल युद्ध, सीमा सुरक्षा और आपातकालीन स्थितियों को संभालने के लिए बनाए जते हैं। अगर पुलिस उनकी भूमिका नहीं निभा सकती तो यह भी सही है कि उनको पुलिस की  भूमिकाएं सौंप देने से सामान्य नागरिक बेवजह प्रताड़ित महसूस करता है।

विधानसभा के बाद संसदीय चुनावों में अतिउत्साह के साथ हिस्सा लेकर वहां के नागरिकों ने दिखा भी दिया है कि सामान्य लोकतांत्रिक जीवन में लौटने की उनकी इच्छा किसी उग्रवादी संगठन की बंधक नहीं है। नागरिकों के इसी उत्साह का प्रतिदान देने के लिए उमर अब्दुल्ला भी चाहते हैं कि उन्होंने साल के शुरू में ही जनता से केंद्रीय बलों की जगह पुलिस की  भू्मिका बढ़ाने का जो वादा किया था उसे पूरा किया जाए। 

एकीकृत कमान की बैठक में स्थानीय संगठनों से वार्ता शुरू करने का भी सुझव आया है। उधर पाकिस्तान से वार्ता का माहौल भी तैयार करने का प्रयास चल रहा है। बेहतर होती इन स्थितियों के बावजूद कश्मीर में कोई भी पहल यकायक और पूरी तरह निश्चिंत हो कर नहीं की जा सकती, इसीलिए सरकार अपने कदम धीरे-धीरे ही बढ़ा रही है।

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