class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

पीयू सीनेट में हुई हाथापाई

मुख्य अतिथि को स्मृति फलक के तौर पर स्वर्णमंदिर की फोटो भेंट किए जाने पर एक सीनेटर के सवाल उठाने के पंजाब यूनिवर्सिटी की सीनेट में जमकर हंगामा हुआ। सीनेटर्स आपस में हाथापाई पर उतर आए और विरोध को देखते हुए सवाल खड़ा करने वाले सीनेटर ने इस्तीफे की पेशकश कर दी और सदन से वाकआउट कर गए। ऐसा पीयू के इतिहास में पहली बार हुआ। इससे पहले एक सीनेटर ने धमकी तो दी थी, लेकिन वह वापस लौट
आया था।


वीरवार को सुबह 9 बजे से शुरू हुई सीनेट में शुरू से ही प्रो. रूपिंदर तिवारी आक्रामक मुद्रा में थे। अचानक शाम को प्रश्नकाल के तहत पोखरा यूनिवर्सिटी के साथ समझोता पत्र पर हस्ताक्षर का मुद्दा प्रो. तिवारी ने उठाया और सदन अध्यक्ष तथा कुलपति को घेरने लगे। इस दौरान सीनेटर अशोक गोयल सहित अन्य सदस्यों ने सदन अध्यक्ष से कहा कि यह प्रो. तिवारी का आचरण सदन की मर्यादा के खिलाफ है। इस पर बहस होने लगी। बात बढ़ी तो गोयल ने आवेदन किया कि उन सवालों को भी सीनेटर्स के सामने रखा जए, जिसमें कई अन्य आपत्तिजनक मुद्दे उठाए गए हैं। इस पर सीनेटरों के आवेदन पर वे उन सवालों को पढ़ने लगे जिन्हें सुबह प्रो. तिवारी ने वापस लेने की पेशकश की थी। इन्हीं सवालों में एक सवाल था स्वर्णमंदिर का स्मृति फलक मुख्य अतिथियों को सम्मान स्वरूप भेंट करने का। बस क्या था। सीनेट में हंगामा शुरू हो गया। इसके पीछे अपनी मन:स्थिति साफ करते हुए प्रो. तिवारी ने लिखा है कि पीयू केवल एक ही प्रकार की स्मृति चिन्ह क्यों चीफ गेस्ट को भेंट करती है। धर्म-संप्रदाय से जुड़े चिन्ह पर ही क्यों जोर दिया जा रहा है। हमें स्मृति चिन्ह में स्वर्ण मंदिर के चित्र की जगह गांधी भवन, रोज गार्डेन, रॉक गार्डेन आदि को शामिल करना चाहिए। इस पर सीनेटर भड़क गए। अपनी जगहों से उठकर वे लॉबी में पहुंचे। इतने में मुनीष मलोट प्रो. तिवारी के पास पहुंचकर आवेग में कहने लगे कि वे सभी के समाने हाथ जोड़कर मांफी मांगे। इस पर प्रो. तिवारी के पक्ष में प्रो. नवलकिशोर ओझ आ गए और उनकी हाथापाई मुनीष से होने लगी। अन्य सदस्यों ने बचाव किया और दोनों को अलग किया। लगभग 40 मिनट तक चले इस प्रकरण के अंत में प्रो. तिवारी सीनेट से यह कहते हुए वाकआउट कर गए कि वे इस सीनेट से इस्तीफा दे रहे हैं।

कोट
मेरा मकसद धार्मिक भावना या किसी संप्रदाय को ठेस पहुंचाना नहीं था। मैं अपने सवाल के जरिए यही बात कहना चाहता था कि स्मृति फलक के तौर पर अन्य हेरिटेज और शहर की पहचान कायम करने वाले स्थानों को भी रखा जए। जहां तक आस्था की बात है, मैं स्वयं अपने बच्चों को लेकर हरिमंदिर जाता हूं। पंजाब में जन्मा हूं और यहां की माटी से मुझे उतना ही प्यार है जितना एक बेटे को अपनी मां से होता है। आज की घटना से मैं काफी क्षुब्ध हूं। मेरे सवाल को गलत रूप दिया जा रहा है। मैं कुलाधिपति डॉ. हामिद अंसारी को अपना इस्तीफा भेज रहा हूं।
प्रो. रूपिंदर तिवारी, इस्तीफा देने वाले सीनेटर

इस तरह के सवाल ही जाहिर करते हैं कि सीनेटर प्रो. तिवारी की मंशा क्या थी। इस तरह के व्यक्ति के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए और राष्ट्रीय एकता व साम्प्रदायिक सौहार्द के खिलाफ साजिश करने के जुर्म में रासुका लगाना चाहिए।
राजबंश सिंह गिल, सीनेटर, पीयू

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:पीयू सीनेट में हुई हाथापाई