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पर्यटक सुविधा केन्द्र पर सुविधाओं का टोटा

बद्रीनाथ व केदारनाथ सहित सिक्खों के पवित्र धाम हेमकुण्ड साहिब, विश्व विख्यात हिमक्रीड़ा स्थल औली, ग्वालदम, रूपकुण्ड जैसे अनेक स्थलों के मुख्य पड़ाव कर्णप्रयाग में पर्यटकों के लिए कोई सुविधा ही नहीं है। इससे यह साबित हो जाता है कि प्रदेश में पर्यटकों को सुविधाएं व पर्यटन प्रदेश के रूप में विकसित करने के सपनों पर किस तरह पानी फेरा जा रहा है। प्रयासों के बाद पर्यटक सुविधा केन्द्र का निर्माण किया गया लेकिन यह भी पर्यटन विभाग की लापरवाही के चलते पर्यटकों को सुविधा देने में असमर्थ है। ऑफ सीजन में तो यह बंद रहता ही है, लेकिन इस बार यात्रा काल में भी यह बंद होने से इसके अस्तित्व पर प्रश्नचिह्न लग गया है।


गौरतलब है कि नगर के नये बस अड्डे पर लाखों की लागत से पांच साल पहले पर्यटकों की सुविधा के लिए विदेशी तर्ज पर सुविधा केन्द्र का निर्माण किया गया था  लेकिन यह अपने शुरूआती कार्यकाल का एक वर्ष छोड़कर पर्यटकों को कोई सुविधा नहीं दे पाया। वर्तमान में यह सुविधा केन्द्र पर्यटकों सहित स्थानीय लोगों के लिए एक उपहास पात्र का बन गया है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों का कहना है कि इस केन्द्र में केवल शौचालय व अल्प विश्राम की व्यवस्था होने से इसके संचालन में दिक्कतें आ रही है। जिस कारण यह सुविधा केन्द्र न हो कर एक बंद बंगले के रूप में परिवर्तित हो कर रह गया है। पर्यटन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार इस सुविधा केन्द्र के संचालन की जिम्मेदारी  गढ़वाल विश्वविद्यालय के हवाले है जो कि पर्यटन विभाग की मदद से इस प्रकार के सुविधा केन्द्रों का संचालन करता है। वर्तमान में इस केन्द्र के  बंद होने व इससे अजिर्त आय के बारे में विभाग के कर्मचारियों द्वारा अनभिज्ञता जतायी। इस मामले में पर्यटन विभाग का कहना है कि विश्वविद्यालय का टूरिज्म विभाग कांटेक्ट पर इसका संचालन कर रहा है। बताया कि अगर यह केन्द्र बंद है तो इस पर छानबीन कर आवश्यक कार्यवाही की जाएगी।

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