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गेहूं भण्डारण की समस्या बनी जी का जंजाल

कानपुर-लखनऊ मार्ग पर अमौसी के पास ट्रकों की लम्बी कतार सड़क के किनारे खड़ी दिखाई देगी। ये ट्रक वाले अपना नम्बर आने का इंतजार कर रहे हैं। इनमें गेहूँ लदा हुआ है। अमौसी के पास सरकारी गोदाम में गेहूँ रखा जाना है। पर गोदाम में जगह ही नहीं है। वहाँ पहले से चावल भरा हुआ है। प्रदेश में कई जगहों पर ऐसी ही समस्या बनी हुई है।


सरकारी एजेंसियां गेहूं खरीद रही हैं लेकिन वह यह नहीं तय कर पा रही हैं कि गेहूं रखें कहां। पिछले दिनों बिचौलियों ने किसानों से सस्ता गेहूं खरीदकर 1080 रुपए कुंतल के भाव सरकार को देना शुरू कर दिया था। सरकार ने बिचौलियों से गेहूं न खरीदने के निर्देश दिए। किसानों को बिचौलियों से बचाने के लिए त्रिस्तरीय निगरानी व्यवस्था की गई। मुख्य सचिव से  लेकर विभागीय अधिकारियों ने गेहूं खरीद की नियमित समीक्षा शुरू कर दी। नतीज यह हुआ गेहूं खरीदा जाने लगा। अब समस्या है रखने की। विभागीय अफसर चिंतित हैं कि उसका भण्डारण कहां करें क्योंकि सरकारी गोदाम पहले से भरे हैं। उनमें लेवी चावल रखने तक की जगह नहीं हैं। 

राज्य सरकार की विभिन्न एजेंसियां इस बार 22 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदेंगी। इनके अलावा भारतीय खाद्य निगम 10 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदेगा। 15 लाख मीट्रिक टन खरीदा जा चुका है। ट्रकों में लदकर गेहूं खरीद कर गोदामों में आने लगा है। गोदाम पहले से भरे हुए हैं और अपने नम्बर आने का सड़क पर इंतजार कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक सरकारी गोदामों में जगह न होने की वजह से अभी तक मुरादाबाद, देवीपाटन, फैजाबाद, गोरखपुर, बस्ती, वाराणसी, आजमगढ़ मंडलों में गेहूं से लदे वाहनों की कतारें गोदाम से लेकर सड़क तक लग गई हैं। समय रहते भंडारण की व्यवस्था नहीं हुई तो बरसात में बाहर रखा गेहूं खराब हो जाएगा।

 

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  • Web Title:गेहूं भण्डारण की समस्या बनी जी का जंजाल